विपक्ष के वॉकआउट के बीच 186 वोटों से मिली मंजूरी
113 जातियों को हटाया गया ओबीसी की सूची से
अब 66 जातियां हैं सूची में
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पारित कर दिए गए। मतदान के दौरान विधेयकों के पक्ष में 186 वोट पड़े, जबकि 17 विधायकों ने विरोध किया। वहीं 6 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
मतदान से पहले ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल विधायक सदन से वॉकआउट कर गए, जबकि कालीघाट गुट के विधायक मतदान में शामिल हुए। ओबीसी रिजर्वेशन बिल में 113 जातियों को सूची से हटाया गया जबकि कुल 66 जातियों को सूची में शामिल किया गया है.
ISF विधायक की मांग पर हुआ डिवीजन वोट
राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में दोनों संशोधन विधेयक पेश किए। शुरुआत में इन्हें ध्वनिमत से पारित करने की तैयारी थी, लेकिन ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने डिवीजन वोट की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने मांग स्वीकार करते हुए मतदान कराया।
मतदान से पहले विपक्ष का वॉकआउट
मतदान शुरू होने से पहले ऋतव्रत बनर्जी गुट के अधिकांश विधायक सदन से बाहर चले गए। हालांकि कुछ विधायक समय पर बाहर नहीं निकल सके। बाद में स्पीकर की अनुमति से उन्हें बाहर जाने दिया गया।
दिलचस्प बात यह रही कि बायरन विश्वास, मोशारफ हुसैन, काजल शेख और तौफीकुर रहमान सहित छह विधायक सदन में ही मौजूद रहे और मतदान से दूरी बनाए रखी। विधेयक पारित होने के बाद सभी विधायक दोबारा सदन में लौट आए।
भाजपा ने पिछली सरकार पर लगाए आरोप
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अरिजीत बक्सी ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल सरकार ने तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के तहत OBC सूची तैयार की थी।
वहीं ऋतव्रत गुट के विधायक विश्वनाथ दास और ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी ने विधेयकों का विरोध किया।
किन विधेयकों को मिली मंजूरी?
विधानसभा ने जिन दो संशोधन विधेयकों को पारित किया, वे हैं—
- West Bengal Backward Classes (Other than SC & ST) Reservation of Vacancies in Services and Posts (Amendment) Bill, 2026
- West Bengal Commission for Backward Classes (Amendment) Bill, 2026
इन संशोधनों का उद्देश्य वर्ष 2012 में लागू OBC आरक्षण कानून में बदलाव करना है।
नए कानून में क्या बदलेगा?
नए संशोधन के तहत OBC आरक्षण व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
- वर्ष 2012 में जोड़ी गई कैटेगरी-B की 78 समुदायों वाली सूची हटाई जाएगी।
- OBC सूची में किसी समुदाय को शामिल करने या हटाने पर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार मिलेगा।
- राज्य सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श के बाद आरक्षण का प्रतिशत तय करेगी।
- जरूरत पड़ने पर आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाया जा सकेगा, लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
- पिछड़ेपन के आधार पर OBC समुदायों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकेगा।
पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका होगी अहम
संशोधित कानून के अनुसार—
- कोई भी नागरिक OBC सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेगा।
- पिछड़ा वर्ग आयोग आवेदन की जांच कर राज्य सरकार को सिफारिश भेजेगा।
- किसी समुदाय के गलत शामिल होने या छूट जाने पर शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।
- आयोग के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष रहेगा।
OBC आरक्षण का इतिहास
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण की शुरुआत वाम मोर्चा सरकार के दौरान हुई थी। उस समय OBC को कैटेगरी-A और कैटेगरी-B में बांटकर क्रमशः 10 प्रतिशत और 7 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
वर्ष 2012 में तत्कालीन तृणमूल सरकार ने कानून में संशोधन कर दोनों श्रेणियों की विस्तृत सूची कानून का हिस्सा बनाई थी। अब भाजपा सरकार उसी व्यवस्था में बड़े बदलाव लेकर आई है।
मुख्य बातें (Highlights)
- विधानसभा में OBC आरक्षण से जुड़े दो संशोधन विधेयक पारित।
- पक्ष में 186 वोट, विरोध में 17 वोट।
- मतदान से पहले ऋतव्रत बनर्जी गुट का वॉकआउट।
- OBC कैटेगरी-B की पुरानी सूची हटाने का प्रस्ताव।
- पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर तय होगा आरक्षण।
- कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।





























