ममता के सिंगूर आंदोलन का अध्याय हटाने का प्रस्ताव
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि राज्य के स्कूलों के पाठ्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को शामिल करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए सिंगूर आंदोलन और टाटा परियोजना से जुड़े अध्याय को पाठ्यपुस्तकों से हटाने का सुझाव भी दिया जाएगा।यह घोषणा सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर कोलकाता के मित्रा इंस्टीट्यूशन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक वर्मन और उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र निर्माण और बंगाल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए उनके बारे में छात्रों को पढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, उन्होंने कहा कि जिन घटनाओं के कारण टाटा समूह को पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा, उन्हें पाठ्यक्रम में बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है।हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पाठ्यक्रम में क्या शामिल होगा और क्या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सिलेबस समिति ही करेगी। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा विभाग से इस संबंध में अनुरोध किया है तथा नई सिलेबस समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखा जाएगा।
मित्रा इंस्टीट्यूशन को मिलेगी 25 लाख रुपये की सहायता
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने विधायक निधि से मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास के लिए 25 लाख रुपये देने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वर्ष 1906 से 1917 तक इसी विद्यालय के छात्र रहे थे और बाद में 1924 से 1938 तक विद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी रहे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृतियों के संरक्षण के लिए 200 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से जुड़ी स्मृतियों और विरासत के संरक्षण के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस परियोजना के लिए राज्य बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हुगली के जीराट में उनके नाम पर एक आधुनिक पुस्तकालय स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के मधुपुर स्थित डॉ. मुखर्जी से जुड़े ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण के लिए झारखंड सरकार से भी बातचीत की जाएगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर कांथी में आयोजित कार्यक्रम में सांसद सौमेंदु अधिकारी ने भी उनकी जीवनी को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की। वहीं, मंत्री सुमना सरकार ने कहा कि इतिहास में भारत की सांस्कृतिक और सनातन विरासत को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
क्या कहना है शिक्षा संगठन का
हमें आज यह जानकारी मिली कि राज्य के मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से इतिहास के पाठ्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को शामिल किया जाएगा।
जिन कारणों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, उन्हीं आधारों पर सीपीआई नेता ज्योति बसु, रतनलाल ब्राह्मण, रूपनारायण राय तथा कांग्रेस नेता डॉ. बिधान चंद्र राय, प्रफुल्ल घोष और निकुंज बिहारी माइती के नाम भी इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में शामिल किए जाने चाहिए।
हम मांग करते हैं कि इतिहास की पुस्तकों में इन सभी नेताओं का उल्लेख भी किया जाए।
— स्वपन मंडल
महासचिव, बंगीय शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी समिति





























