बागी विधायक ने पुलिस से की जांच की मांग
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी खेमे से जुड़े विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के समर्थक माने जाने वाले एक विधायक ने पार्टी के तीन बैंक खातों में अवैध तरीके से प्राप्त धन जमा होने का आरोप लगाते हुए पुलिस से जांच की मांग की है। इस शिकायत के आधार पर विधाननगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता विधायक अकेले नहीं हैं। तृणमूल के कई अन्य बागी विधायक भी जल्द ही इसी तरह की शिकायत पुलिस के पास दर्ज करा सकते हैं।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के खातों में होने वाले वित्तीय लेन-देन को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की। हाल ही में पार्टी के संगठनात्मक फेरबदल में अरूप विश्वास की जगह पूर्व राज्यसभा सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती को कोषाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन बैंकिंग प्रक्रिया पूरी न होने के कारण आधिकारिक रूप से अभी भी अरूप विश्वास ही खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (सिग्नेटरी) हैं।
अरूप विश्वास ने आशंका जताई है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में खातों में होने वाले किसी भी विवादित लेन-देन के लिए उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से उन्होंने बैंक से खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया है।
उधर, दक्षिण 24 परगना के एक विधायक ने विधाननगर साइबर थाने में दर्ज शिकायत में उसी निजी बैंक के तीन खातों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि सत्ता और पद के दुरुपयोग के जरिए प्राप्त अवैध धन इन खातों में जमा किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से इन खातों में लेन-देन किया जाता है और यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत नष्ट हो सकते हैं।
हालांकि शिकायत पत्र में खाताधारकों के नाम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन चुनाव आयोग को पहले दी गई जानकारी के अनुसार इनमें से एक खाता अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम पर है, जबकि अन्य दो खाते पार्टी की त्रिपुरा और गोवा इकाइयों के नाम से दर्ज बताए जाते हैं।
इस मामले में गोवा विधानसभा चुनाव का मुद्दा भी फिर से चर्चा में आ गया है। वर्ष 2022 के गोवा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और चुनाव आयोग को दिए गए ब्यौरे में लगभग 47.54 करोड़ रुपये खर्च करने की जानकारी दी थी। इसके बावजूद पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी। तुलना में भाजपा ने लगभग 17.75 करोड़ रुपये खर्च कर 20 सीटों पर जीत हासिल की थी।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले भी आरोप लगा चुका है कि गोवा चुनाव के दौरान कथित कोयला तस्करी से जुड़ा धन चुनावी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ था। इसी मामले में चुनावी रणनीतिकार संस्था आईपैक (I-PAC) के कुछ अधिकारियों से पूछताछ और कार्रवाई भी हुई थी।
अब तृणमूल के बैंक खातों को लेकर उठे नए सवालों ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुलिस जांच में क्या सामने आता है, इस पर राज्य की राजनीति की नजर टिकी हुई है।





























