न्यू टाउन की बैठक में बागी गुट का बड़ा फैसला
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने न्यू टाउन के एक होटल में बैठक कर पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यसमिति गठित करने का दावा किया। बागी नेताओं ने कहा कि अब वही “असल तृणमूल” हैं।
अरूप रॉय को बनाया गया नया चेयरमैन
बैठक में हावड़ा मध्य के विधायक अरूप रॉय को नई राष्ट्रीय कार्यसमिति का चेयरमैन घोषित किया गया। इसके साथ ही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पुरानी समिति को भंग करने का दावा किया गया।
अभिषेक बनर्जी महासचिव पद से हटाए गए
बागी गुट ने बड़ा फैसला लेते हुए अभिषेक बनर्जी को अखिल भारतीय महासचिव पद से हटाने की घोषणा की। उनकी जगह नई टीम का गठन किया गया।
नई कमेटी में किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी?
उपाध्यक्ष
- अरूप विश्वास
- फिरहाद हाकिम
- रथीन घोष
महासचिव
- ऋतब्रत बनर्जी
- जावेद खान
- संदीपन साहा
- सबीना यास्मीन
कोषाध्यक्ष
- अखरुज्जमान
बागी गुट ने क्यों बनाई नई कार्यसमिति?
बागी नेताओं का दावा है कि पार्टी संविधान के अनुसार हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होनी चाहिए। उनका आरोप है कि 2022 के बाद ऐसी कोई बैठक नहीं हुई। इसी आधार पर पुरानी समिति को भंग कर नई समिति बनाई गई।
बैठक में नहीं दिखी ममता बनर्जी की तस्वीर
बैठक में लगाए गए बैनरों पर ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं थी। इसके बजाय महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, रवींद्रनाथ ठाकुर और काजी नजरुल इस्लाम की तस्वीरें लगाई गई थीं।
कालीघाट खेमे का पलटवार
बैठक के कुछ ही घंटों बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट खेमे ने कार्रवाई करते हुए कई नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
जिन नेताओं को नोटिस भेजा गया:
- फिरहाद हाकिम
- जावेद खान
- अरूप रॉय
- अरूप विश्वास
- रथीन घोष
- सबीना यास्मीन
- स्नेहाशीष चक्रवर्ती
- बिप्लब मित्र
कुणाल घोष ने दावों को किया खारिज
तृणमूल नेता कुणाल घोष ने बागी गुट के दावों को खारिज करते हुए कहा, “तृणमूल और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं। पार्टी संविधान के तहत इन नेताओं को इस तरह की घोषणा करने का कोई अधिकार नहीं है।”
कैसे शुरू हुआ तृणमूल में विद्रोह?
- विधानसभा चुनाव में हार के बाद असंतोष बढ़ा।
- कथित हस्ताक्षर जालसाजी विवाद ने संकट को और गहरा किया।
- पहले 58 विधायकों के समर्थन से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया।
- इसके बाद कई विधायक और सांसद बागी खेमे में शामिल होते गए।
TMC में दो फाड़, असली पार्टी कौन?
तृणमूल के भीतर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि असली संगठन किसके पास है। एक ओर ममता बनर्जी का कालीघाट खेमा है, तो दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट, जो खुद को असली तृणमूल बता रहा है।
प्रमुख बिंदु
✔ अरूप रॉय बने नए चेयरमैन
✔ अभिषेक बनर्जी महासचिव पद से हटाए गए
✔ फिरहाद हाकिम और अरूप विश्वास नई कमेटी में शामिल
✔ कई नेताओं को कारण बताओ नोटिस
✔ TMC में आंतरिक संघर्ष और तेज




























