GRSE कार्यक्रम में पर्यटन एवं संसदीय कार्य मंत्री का संबोधन: गंगा किनारे इको-टूरिज्म और रिवर टूरिज्म को मिलेगी नई पहचान
कोलकाता: संसदीय कार्य और पर्यटन विभाग के माननीय मंत्री ने आज गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) के विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने राज्य में इको-टूरिज्म, रिवर टूरिज्म और कनेक्टिविटी को सशक्त करने वाली लैंडमार्क पहलों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम की शुरुआत में मंत्री जी ने कहा – “आज के इस शुभ दिन पर, मैं आप सभी को अपनी शुभकामनाएं और बधाई देता हूं।” उन्होंने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, मेहमानों, मीडिया के साथियों और GRSE के अधिकारियों व इंजीनियरों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप ग्रीन मोबिलिटी की ओर कदम
मंत्री जी ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी के विजन के तहत भारत सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन मोबिलिटी में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आइकॉनिक, वर्ल्ड-क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने का उनका विजन हमारे रिवराइन ट्रांसपोर्ट लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिससे राष्ट्रीय पर्यटन प्राथमिकताएं सीधे पश्चिम बंगाल में आ रही हैं।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी महाशय के मजबूत नेतृत्व और मार्गदर्शन में पश्चिम बंगाल सरकार आर्थिक विकास, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पर्यटन विभाग भी इस प्रयास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तत्पर है।
नदी पर्यटन: क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का नया इंजन
मंत्री जी ने नदी पर्यटन के आर्थिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक है। यह गंगा किनारे स्थानीय नाविकों, विक्रेताओं, हेरिटेज गाइड और हॉस्पिटैलिटी ऑपरेटरों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करता है।
इको-फ्रेंडली नदी परिवहन स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देता है, पवित्र नदी तटों को संरक्षित करता है और ऐतिहासिक नदी मार्गों को टिकाऊ व्यापार और पर्यटन हब में बदलता है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में नदी पर्यटन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन दुर्भाग्य से हमारे राज्य में इस सेक्टर को अब तक ठीक से एक्सप्लोर नहीं किया गया था।
मुख्य आकर्षण: GRSE द्वारा निर्मित दो हाइब्रिड इलेक्ट्रिक फेरी
इको-फ्रेंडली इनलैंड वॉटर ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग ने WBTDCL के माध्यम से 200-पैसेंजर हाइब्रिड इलेक्ट्रिक फेरी की खरीद की है। इनका निर्माण सेंट्रल PSU गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है।
फेरी की विशेषताएं:
- हाई स्टेबिलिटी और सुरक्षा के लिए ट्विन-हल कैटामारन डिजाइन
- सोलर पैनल इंटीग्रेशन के साथ लिथियम-आयन बैटरी प्रोपल्शन
- IRS क्लासिफिकेशन
- इमरजेंसी पावर बैकअप, फायर-फाइटिंग सिस्टम और लाइफ-सेविंग उपकरण
मंत्री जी ने कहा, “यह पहल सेंटर-स्टेट कोलेबोरेशन का एक नया पैटर्न सेट कर रही है – एक सेंट्रल PSU और स्टेट टूरिज्म के बीच एक ऐतिहासिक कोलेबोरेशन।”
इंटीग्रेटेड टूरिज्म कॉरिडोर: “गंगा के किनारे लिटिल यूरोप”
सरकार हुगली नदी के किनारे एक इंटीग्रेटेड टूरिज्म कॉरिडोर विकसित कर रही है। यह रूट बाबूघाट को मायापुर से जोड़ेगा और दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, हंसेश्वरी मंदिर तथा बैरकपुर के अन्नपूर्णा मंदिर जैसे तीर्थस्थलों को कवर करेगा।
यह कॉरिडोर बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर और बंदेल को शामिल करते हुए ऐतिहासिक “लिटिल यूरोप बाय द गंगा” हिस्से को हाईलाइट करेगा, जो हमारी समृद्ध औपनिवेशिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को दर्शाता है।
केंद्रीय सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
प्रोजेक्ट फंडिंग: कुल ₹45.024 करोड़ की यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट – डेवलपमेंट ऑफ आइकॉनिक टूरिस्ट सेंटर्स टू ग्लोबल स्केल (SASCI)’ योजना के तहत वित्तपोषित है।
चार्जिंग और जेट्टी इंफ्रास्ट्रक्चर: बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर और हुगली पोंटून पर चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। WBTDCL के सहयोग से कोलकाता, बैरकपुर, श्रीरामपुर, चंदननगर, हुगली, अंबिका कालना, मटियारा, नादिया और बारानगर में नई जेट्टियों की योजना है।
उत्तर बंगाल में भी सशक्त हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर: जलदापारा बेली ब्रिज
मंत्री जी ने जानकारी दी कि GRSE की मदद से अरण्य टूरिज्म प्रॉपर्टी, जलदापारा (अलीपुरद्वार) में लंबे समय से चली आ रही कनेक्टिविटी की समस्या को हल करने के लिए दो बेली ब्रिज बनाए जा रहे हैं। इसकी फाउंडेशन इंजीनियरिंग को IIEST, शिबपुर का तकनीकी सहयोग मिल रहा है, जिससे उत्तर बंगाल की सबसे बड़ी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में विजिटर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
पश्चिम बंगाल सरकार का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में मंत्री जी ने कहा, “हमारा मुख्य मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, हेरिटेज को बचाना और टूरिस्टों को बिना किसी रुकावट के सुविधा देकर एक हरा-भरा और खुशहाल पश्चिम बंगाल बनाना है। पश्चिम बंगाल सरकार एक मॉडर्न, इको-फ्रेंडली, डिसिप्लिन्ड और वर्ल्ड-क्लास टूरिज्म इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो हमारी समृद्ध विरासत का सम्मान करे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाए।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहला पवित्र कदम होगा जिससे हुगली नदी के किनारे रिवर टूरिज्म का पूर्ण विकास होगा और नेशनल वाटरवे-1 तथा नेशनल वाटरवे-97 के माध्यम से दक्षिण में दूर-दराज के सुंदरबन गांवों से लेकर उत्तर में बनारस तक के लोगों के व्यापार और सुविधा के लिए जलमार्ग बेहतर तरीके से कार्य करेंगे, जो पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को बदल देगा।




























