ACB ने संजीब नंदी को रंगे हाथों पकड़ा; हावड़ा से बारुईपुर और बिधाननगर तक फैले नेटवर्क की जांच शुरू
कोलकाता : ट्रकों की ‘नो-एंट्री’ पाबंदी के बीच अवैध तरीके से शहर में प्रवेश दिलाने के नाम पर पैसे वसूलने वाले एक बड़े नेटवर्क का राज्य के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पता लगाया है। मामले में हावड़ा निवासी संजीब नंदी को ट्रक चालकों से कथित तौर पर पैसे वसूलते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी को संदेह है कि संजीब इस पूरे नेटवर्क की सिर्फ एक कड़ी है और इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।
कई ट्रैफिक गार्ड्स के नाम पर वसूली का आरोप
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संजीब कथित तौर पर हावड़ा, कोलकाता, बारुईपुर और बिधाननगर ट्रैफिक गार्ड्स के नाम पर ट्रक चालकों से रकम इकट्ठा करता था। ACB की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मामला सिर्फ अवैध वसूली तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक ऐसा नेटवर्क होने की आशंका है, जो कथित तौर पर कई वर्षों से सक्रिय है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, हुगली का डानकुनी इस पूरे नेटवर्क का अहम केंद्र हो सकता है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित सिंडिकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसकी पहुंच कितनी दूर तक है।
‘नो-एंट्री’ में प्रवेश के लिए तय थी फीस
ACB की जांच के अनुसार, कथित रैकेट एक तय प्रक्रिया के तहत काम करता था। डानकुनी पहुंचने वाले ट्रक चालकों को पैसे के बदले ऐसे समय में भी शहर में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया जाता था, जब ट्रकों के लिए ‘नो-एंट्री’ लागू होती थी।
ट्रक चाहे दूसरे राज्यों से कोलकाता की ओर आ रहे हों या शहर से बाहर जा रहे हों, कथित तौर पर रकम देने के बाद उन्हें प्रतिबंधित मार्गों से गुजरने की सुविधा मिलने का दावा किया जाता था।
‘गाइड’ से लेकर ‘ऑपरेटर’ तक, ऐसे चलती थी पूरी चेन
जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि इस नेटवर्क में अलग-अलग स्तर पर कई लोग काम करते थे। दूसरे राज्यों और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से डानकुनी पहुंचने वाले ट्रक चालकों से संपर्क करने के लिए कुछ लोगों को ‘गाइड’ के तौर पर तैनात किया गया था।
ये कथित ‘गाइड’ ट्रक चालकों से संपर्क कर उन्हें ‘नो-एंट्री’ के दौरान प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया समझाते थे। इसके बाद वे चालकों को एक ‘ऑपरेटर’ का फोन नंबर देते थे।
सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद ‘ऑपरेटर’ ट्रक चालक से संपर्क कर प्रति ट्रक करीब ₹2,000 से ₹2,500 की रकम मांगता था। भुगतान के लिए कथित तौर पर कैश, UPI और बैंक ट्रांसफर जैसे अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
रकम मिलने के बाद ट्रक चालक को प्रतिबंधित इलाके से गुजरने की अनुमति मिलने का भरोसा दिया जाता था।
चेन सिस्टम पर चल रहा था नेटवर्क!
ACB को आशंका है कि यह कोई छोटा-मोटा अवैध वसूली का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क हो सकता है। जांच सूत्रों के मुताबिक, इसमें ऊपर के स्तर पर कथित तौर पर मुख्य संचालक हैं, जबकि उनके नीचे अलग-अलग स्तरों पर काम करने वाले लोग जुड़े हुए हैं।
जांच एजेंसी इस बात का भी पता लगा रही है कि यह नेटवर्क वास्तव में कब से सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक, इसके 2014 के आसपास से सक्रिय होने की आशंका है।
पैसे देने के बाद कार्रवाई से बचने का दावा
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर रकम का भुगतान करने वाले ट्रक चालकों को ‘नो-एंट्री’ क्षेत्र से गुजरने के दौरान कार्रवाई या जुर्माने से बचने का भरोसा दिया जाता था। इसी वजह से बड़ी संख्या में ट्रक कथित तौर पर प्रतिबंधित समय में भी विभिन्न ट्रैफिक जोन से गुजरते रहे।
संजीब की गिरफ्तारी के बाद आगे बढ़ेगी जांच
ACB अब संजीब नंदी से पूछताछ के जरिए इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पैसे किस-किस तक पहुंचते थे, ‘गाइड’ और ‘ऑपरेटर’ की भूमिका निभाने वाले लोग कौन हैं और क्या इस पूरे मामले में किसी सरकारी कर्मचारी या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति की भी भूमिका है।
ACB सूत्रों के मुताबिक, संजीब नंदी की गिरफ्तारी इस जांच की शुरुआत भर है। अब एजेंसी का फोकस पूरे नेटवर्क की पहचान करने और इसके वित्तीय लेन-देन का पता लगाने पर है।





























