कोलकाता: जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवारों पर लिखे नारों और बनाई गई ग्रैफिटी को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। वाइस-चांसलर की अपील के कुछ ही घंटों बाद मंगलवार देर रात कैंपस की कई दीवारों पर लिखे नारे और चित्र सफेद रंग से ढक दिए गए। अब छात्रों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह काम किसके आदेश पर और किसने किया?
छात्र संगठनों का दावा है कि उन्हें देर रात सूचना मिली थी कि यूनिवर्सिटी कैंपस में दीवारों पर लिखे नारों और ग्रैफिटी को मिटाया जा रहा है। हालांकि, उनका आरोप है कि हॉस्टल में मौजूद छात्रों को तत्काल कैंपस से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। जब कुछ छात्र आधी रात के आसपास कैंपस पहुंचे, तब तक दीवारों पर सफेदी का काम पूरा हो चुका था और वहां मौजूद लोग जा चुके थे।
आधी रात को कैंपस में कौन पहुंचा?
रिवोल्यूशनरी स्टूडेंट्स फ्रंट (RSF) की जादवपुर यूनिट के सचिव इंद्रनुज रॉय ने दावा किया कि रात करीब 12:30 बजे उन्हें जानकारी मिली कि कुछ लोग खुद को कोलकाता पुलिस और कोलकाता नगर निगम (KMC) का कर्मचारी बताते हुए गेट नंबर 4 से कैंपस में दाखिल हुए हैं।
इंद्रनुज रॉय के मुताबिक, बताया गया कि नगर निगम के कर्मचारी दीवारों पर बनी ग्रैफिटी और लिखे नारों को मिटाने के लिए पहुंचे थे, जबकि पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए उनके साथ थे।
उन्होंने दावा किया कि सूचना मिलने के बाद हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं मिल सकी। अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश भी कथित तौर पर सफल नहीं हुई।
बाद में जब छात्र कैंपस पहुंचे, तो उन्होंने कई दीवारों पर सफेद रंग की नई परत देखी। इसके बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कर छात्र संगठनों ने सवाल उठाया कि आखिर आधी रात को दीवारों पर सफेदी किसने करवाई?
पुलिस के कैंपस में प्रवेश को लेकर भी सवाल
छात्र संगठन अब इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस के प्रवेश की प्रक्रिया क्या थी। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस के प्रवेश के लिए सामान्य परिस्थितियों में प्रशासन, यानी वाइस-चांसलर या रजिस्ट्रार की अनुमति की आवश्यकता होती है।
छात्रों का सवाल है कि यदि मंगलवार देर रात पुलिसकर्मी कैंपस में मौजूद थे, तो उन्हें किसकी अनुमति से प्रवेश दिया गया? हालांकि, इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन या पुलिस की ओर से तत्काल कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
क्या है पूरा मामला?
जादवपुर यूनिवर्सिटी में दीवार लेखन को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों से जारी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पिछले रविवार को कैंपस की दीवारों पर छात्रों द्वारा लिखे गए नारों को मिटाया था।
हालांकि, इसके 24 घंटे से भी कम समय बाद कुछ दीवारों पर दोबारा नारे लिखे दिखाई दिए। इनमें कार्ल मार्क्स का एक कथित उद्धरण भी शामिल था। इसके बाद स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की ओर से भी दीवार लेखन अभियान चलाया गया और कैंपस की दीवारों पर नए नारे लिखे गए।
सोमवार की घटना के बाद मंगलवार देर रात एक बार फिर इन नारों और ग्रैफिटी को सफेद रंग से ढक दिया गया।
वीसी ने की थी दीवार लेखन से बचने की अपील
इस पूरे विवाद के बीच मंगलवार सुबह जादवपुर यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर चिरंजीब भट्टाचार्य ने सभी पक्षों से कैंपस की सुंदरता, स्वच्छता और गरिमा बनाए रखने की अपील की थी।
वीसी ने कहा था कि वह विश्वविद्यालय की दीवारों पर किसी भी तरह के लेखन के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को स्वीकार करते हुए छात्रों और अन्य पक्षों से अपील की कि वे विश्वविद्यालय की दीवारों या अन्य ढांचों पर बिना अनुमति नारे, ग्रैफिटी, पोस्टर अथवा इस तरह की अन्य गतिविधियां न करें।
हालांकि, वीसी की अपील के कुछ ही घंटों बाद दीवारों पर बनी ग्रैफिटी को सफेद रंग से ढके जाने के बाद विवाद फिर तेज हो गया है। फिलहाल छात्रों का सवाल है कि आखिर मंगलवार देर रात जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में दीवारों की सफेदी किसने करवाई और किसकी अनुमति से यह कार्रवाई हुई? इस सवाल पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब का इंतजार है।





























