कोलकाता: साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में जादवपुर थाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर देश के अलग-अलग हिस्सों से मिली करीब 15 शिकायतों की जांच के दौरान इस नेटवर्क का सुराग मिला।
जिस दुकान के नाम पर जारी हुए सिम, वह थी ही नहीं
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि साइबर अपराधों में इस्तेमाल किए गए करीब 10 सिम कार्ड ‘मां वैरायटी’ नाम की एक कथित दुकान के नाम पर जारी किए गए थे। दस्तावेजों में इस दुकान का पता बागहातिन कॉलोनी का दर्ज था। हालांकि, मौके पर सत्यापन के दौरान पुलिस को इस नाम की कोई दुकान नहीं मिली।
इसके बाद पुलिस ने शुक्रवार को जादवपुर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के आधार पर पुलिस ने पिंटू घोष, राजीव पासवान और बाबू सोना हलदर को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, पिंटू घोष पर सिम कार्ड जारी कराने की मंजूरी से जुड़े एक फर्जी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने और उस पर मुहर लगाने का आरोप है। उसे एकडालिया इलाके से गिरफ्तार किया गया। वहीं, राजीव पासवान और बाबू सोना हलदर की कथित भूमिका सिम कार्ड की खरीद-फरोख्त में सामने आई है।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम जारी कराने की जांच
पुलिस को आशंका है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर फ्रॉड, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य ऑनलाइन अपराधों के लिए किया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कुल कितने सिम कार्ड जारी कराए गए।
पुलिस सिम जारी करने वाले पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंटों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे गिरोह के काम करने के तरीके का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।





























