मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी बोले- एकमुश्त भुगतान संभव नहीं हुआ तो किश्तों में चुकाया जाएगा बकाया, भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी
कोलकाता : शिक्षक दिवस के मौके पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बड़े ऐलान किए। न्यू टाउन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘विद्यासागर शिक्षा सम्मान’ समारोह में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये का भुगतान करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि यदि पूरी राशि का भुगतान एकमुश्त करना संभव नहीं हुआ, तो सरकार बकाया DA को किश्तों में चुकाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया DA के भुगतान के लिए सरकार ने करीब 12,000 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में सरकार इंदु मल्होत्रा समिति के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
उन्होंने कहा, “हो सकता है कि हम पूरी राशि का भुगतान एक ही दिन में न कर पाएं, लेकिन अगर मल्होत्रा समिति निर्देश देती है, तो हम निश्चित रूप से सहयोग करेंगे।” मुख्यमंत्री ने DA को कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि महंगाई बढ़ने के दौर में शिक्षकों और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी है।
पूजा से पहले कर्मचारियों को 20 फीसदी DA समेत अग्रिम वेतन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूजा के त्योहारों से पहले सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम वेतन का भुगतान करेगी। इसमें 20 फीसदी DA भी शामिल होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह भुगतान पुराने DA एरियर के रूप में नहीं होगा।
उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के समय केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के DA में 42 प्रतिशत का अंतर था। सरकार में आने के बाद कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के हित में कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन शिक्षकों के बकाया DA का मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है।
कलकत्ता हाई कोर्ट भी राज्य सरकार से सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बकाया DA पर अपना रुख स्पष्ट करने को कह चुका है। अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार से 11 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री की ओर से बकाया DA को लेकर दिया गया यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं होने का दावा
मुख्यमंत्री ने शिक्षक भर्ती को लेकर भी सरकार की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और साफ-सुथरा बनाया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अपारदर्शी भर्ती प्रक्रिया ने शिक्षकों के सम्मान को नुकसान पहुंचाया। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अब भर्ती में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा, “निश्चिंत रहें, कोई गड़बड़ी नहीं होगी।”
शिक्षकों का बोझ कम करने के लिए सपोर्ट स्टाफ की भर्ती
मुख्यमंत्री ने स्कूलों में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सपोर्ट स्टाफ की भर्ती की जाएगी, ताकि शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय प्रशासनिक और अन्य गैर-शैक्षणिक कामों में अपना समय नहीं लगाना पड़े।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को मिड-डे मील जैसे कार्यों का हिसाब-किताब रखने में अपना समय खर्च करने के बजाय बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को उनके मूल दायित्व यानी शिक्षण कार्य पर केंद्रित करना है।
पिछली सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने पिछली तृणमूल सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार अब ऐसी गलतियों को दोहराने नहीं देगी। उन्होंने हाल ही में कोलकाता के भवानीपुर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन में एक छात्र को सांप काटने की घटना का जिक्र करते हुए स्कूलों को मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि स्कूल को तीन वर्षों तक कंपोजिट ग्रांट नहीं मिली। उन्होंने कहा कि भले ही यह राशि बहुत बड़ी न हो, लेकिन इससे स्कूल में कार्बोलिक एसिड और फिनाइल जैसी जरूरी चीजें खरीदी जा सकती थीं।
शिक्षक दिवस के मंच से मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ शिक्षकों के सम्मान, पारदर्शी भर्ती और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान देगी। अब निगाहें DA बकाये के मामले में अदालत और इंदु मल्होत्रा समिति के अगले निर्देशों पर टिकी हैं।





























