जवाब दाखिल करने का निर्देश
नई दिल्ली/कोलकाता: दल-बदल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 ‘बागी’ तृणमूल कांग्रेस सांसदों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया। अदालत ने सभी 20 सांसदों से अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लंबित 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका पर जल्द फैसला कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनका आरोप था कि स्पीकर के समक्ष आवेदन दिए जाने के बावजूद लंबे समय से इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी 20 सांसदों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर निर्वाचित हुए थे और बाद में दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हुए। ऐसे में उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून लागू होना चाहिए।
इससे पहले जुलाई में अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी ने 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क किया था। अगस्त में भी अभिषेक बनर्जी ने इसी मांग को लेकर स्पीकर से मुलाकात की थी।
अभिषेक बनर्जी का आरोप था कि ये सांसद सार्वजनिक रूप से खुद को एनसीपीआई का सदस्य बता रहे हैं, जबकि संसद में उनके नाम के साथ अभी भी एआईटीसी (ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस) लिखा हुआ है। उन्होंने इसे दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का मामला बताया।
वहीं, एनसीपीआई में शामिल होने वाली बारासात की सांसद काकली घोष दस्तीदार ने अभिषेक बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि लोकसभा के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार स्पीकर के पास है।
अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद 20 सांसद अपना पक्ष किस तरह रखते हैं और अगली सुनवाई में अदालत क्या निर्देश देती है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर है।





























