पैतृक घर को संग्रहालय में बदलेगी सरकार; 200 करोड़ रुपये की परियोजना
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक, शिक्षाविद् और देश के प्रख्यात राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत को संरक्षित और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। राज्य सरकार ने चालू बजट में उनके पैतृक आवास के विकास, 125 फीट ऊंची प्रतिमा के निर्माण, भवन के जीर्णोद्धार और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।सरकारी योजना के अनुसार, हुगली जिले के जिराट स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पैतृक घर को एक आधुनिक संग्रहालय (म्यूजियम) के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही परिसर में स्मृति पार्क, पुस्तकालय और शोध केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि देश भर से आने वाले लोग उनके जीवन, विचारों और योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकें।
जिराट में स्थापित होगी पूर्णाकृति प्रतिमा
परियोजना के तहत जिराट में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एक भव्य पूर्णाकृति प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा इस पूरे स्मारक परिसर का प्रमुख आकर्षण होगी। सरकार का उद्देश्य इस स्थान को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करना है।
जयंती पर सरकारी अवकाश का फैसला
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सम्मान में पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी जयंती 6 जुलाई को राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इस वर्ष भी पूरे राज्य में सरकारी स्तर पर उनकी जयंती विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई गई। सरकार का कहना है कि उनके जीवन और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
परिवार के पास है पैतृक संपत्ति की जिम्मेदारी
वर्तमान में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाई बामाप्रसाद मुखर्जी के पौत्र बाणीप्रसाद मुखर्जी सहित परिवार के अन्य सदस्य इस ऐतिहासिक पैतृक संपत्ति की देखरेख कर रहे हैं। सरकार की योजना के तहत परिवार के सहयोग से इस भवन को संरक्षित करते हुए इसे संग्रहालय का स्वरूप दिया जाएगा।
जिराट में अब तक नहीं था बड़ा स्मारक
जिराट, जो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के परिवार से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान है, वहां अब तक उनके नाम पर कोई बड़ा सरकारी स्मारक या संस्थान नहीं था। हालांकि, स्थानीय भाजपा नेताओं की पहल पर पहले एक छोटी प्रतिमा स्थापित की गई थी।वहीं, उनके पिता और प्रसिद्ध शिक्षाविद् ‘बंगाल के बाघ’ सर आशुतोष मुखर्जी के नाम पर जिराट में पहले से एक विद्यालय और एक पुस्तकालय मौजूद हैं। अब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में भी एक भव्य और स्थायी स्मारक तैयार किया जा रहा है।
आधुनिक ऑडिटोरियम का भी होगा निर्माण
सरकारी परियोजना के तहत संग्रहालय और स्मृति पार्क के अलावा जिराट में एक आधुनिक ऑडिटोरियम का भी निर्माण किया जाएगा। यहां भविष्य में व्याख्यान, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शोध संगोष्ठियां और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेंगी। इससे जिराट को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद जिराट राज्य के प्रमुख विरासत एवं पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और शोधकर्ता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनके योगदान को नजदीक से जान सकेंगे।इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से पश्चिम बंगाल सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ जिराट को एक प्रमुख सांस्कृतिक, शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।






























