अलिपुर कोर्ट ने 14 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा, बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और धाराओं पर उठाए सवाल
कोलकाता : मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बाबा बागेश्वर के नाम से भी जाना जाता है, की तस्वीर जलाने के आरोप में गिरफ्तार दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस के महासचिव अतनु दास को अलिपुर कोर्ट ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने शुक्रवार को अतनु दास को अदालत में पेश कर सात दिनों की हिरासत की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें 14 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया।
अतनु दास को बुधवार रात उनके घर से गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई बाबा बागेश्वर की तस्वीर जलाने की घटना में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश के बाद की गई।
गिरफ्तारी को बचाव पक्ष ने बताया गैरकानूनी
अदालत में अतनु दास की ओर से पेश वकील ने पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति या विचारधारा के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना संविधान के तहत मिले अधिकारों के दायरे में आता है।
वकील ने अदालत में सवाल उठाया कि घटना से जुड़े अन्य लोगों की पहचान वीडियो फुटेज के जरिए की जा सकती है। ऐसे में केवल अतनु दास को पुलिस हिरासत में रखने की आवश्यकता क्यों है? बचाव पक्ष ने कहा कि यदि प्रदर्शन में अन्य लोग भी शामिल थे तो पुलिस वीडियो फुटेज की जांच कर उनकी भी पहचान करे।
गिरफ्तारी के तरीके पर भी सवाल
बचाव पक्ष ने अतनु दास की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। वकील का आरोप था कि पुलिस रात में उनके मुवक्किल के घर पहुंची और दरवाजे पर लात मारकर कार्रवाई की। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी के इस तरीके को अनुचित बताया।
अदालत के बाहर भी वकील ने सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिस व्यक्ति के कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, जबकि विरोध प्रदर्शन करने वालों को गिरफ्तार किया गया।
बचाव पक्ष ने विधानसभा से गिरफ्तारी के निर्देश दिए जाने के कथित मामले पर भी सवाल उठाया और इसे न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताया। वकील का दावा था कि अतनु दास के खिलाफ लगाई गई धाराएं इस मामले में लागू नहीं होतीं।
सरकारी पक्ष ने कहा—घटना के पीछे की मंशा जानना जरूरी
सरकार की ओर से अधिवक्ता सौरीन घोषाल ने पुलिस हिरासत की मांग का समर्थन किया। उन्होंने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पोस्टर जलाए गए, जूते मारे गए और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। उन्होंने बताया कि एक संगठन की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया और इसके बाद गिरफ्तारी की गई।
सरकारी पक्ष ने कहा कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर यह पता लगाना चाहती है कि प्रदर्शन के पीछे आरोपियों की मंशा क्या थी और घटना किन परिस्थितियों में हुई। इसी आधार पर पुलिस ने अतनु दास की हिरासत की मांग की।
सरकारी वकील ने यह भी दलील दी कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के देशभर में बड़ी संख्या में अनुयायी हैं। ऐसे में इस तरह की घटना का व्यापक असर हो सकता है। सरकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि घटना से राज्य की छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
14 सितंबर तक पुलिस हिरासत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अलिपुर कोर्ट ने अतनु दास को 14 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। अब पुलिस हिरासत के दौरान जांच में घटना के वीडियो फुटेज, प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों और कथित तौर पर घटना के पीछे की मंशा समेत कई पहलुओं की जांच की जाएगी।































