चुनाव आयोग के सामने ऋतब्रत और कालीघाट गुट ने रखा अपना दावा
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के भीतर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गया है। शनिवार को चुनाव आयोग के समक्ष ‘ऋतब्रत-तृणमूल’ और ‘कालीघाट-तृणमूल’ दोनों गुटों ने अपना पक्ष रखा। दोनों ही गुटों ने पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अपना अधिकार जताया है। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग समय पर अपना पक्ष रखने का मौका दिया।
ऋतब्रत गुट का दावा क्या है?
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के सामने संगठन में अपने समर्थन और बहुमत से जुड़े दस्तावेज पेश किए। इस गुट का दावा है कि पार्टी पर किसी एक व्यक्ति का एकतरफा अधिकार नहीं हो सकता। उसके मुताबिक, संगठनात्मक और विधायी समर्थन के आधार पर ही यह तय होना चाहिए कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन-सा गुट है।
ऋतब्रत गुट पहले भी आयोग के समक्ष अपनी ओर से दस्तावेज और साक्ष्य पेश कर चुका है। ऋतब्रत ने कहा कि उन्होंने आयोग के सवालों के जवाब दिए हैं और जरूरी दस्तावेज भी जमा कराए हैं। उनका कहना है कि अब फैसला चुनाव आयोग को करना है।
कालीघाट तृणमूल ने क्या कहा?
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले ‘कालीघाट-तृणमूल’ गुट ने पार्टी के नाम और ‘जोड़ाफूल’ प्रतीक पर अपना दावा बरकरार रखा। इस गुट का तर्क है कि तृणमूल कांग्रेस की पहचान और संगठन की बुनियाद ममता बनर्जी ने रखी है। इसलिए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उनका दावा स्वाभाविक और वैध है।
कालीघाट गुट के नेताओं ने ऋतब्रत गुट के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व के बिना तृणमूल की पहचान की कल्पना नहीं की जा सकती।
उपचुनाव से पहले फैसला अहम
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर है। ऐसे में चुनाव आयोग का फैसला दोनों गुटों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग यह देखेगा कि संगठनात्मक और विधायी समर्थन किस गुट के पास है और उसी आधार पर पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न को लेकर आगे का निर्णय लिया जा सकता है।
































