सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव आयोग को सौंपना है हलफनामा, तृणमूल के असली गुट को लेकर दोनों खेमों में बढ़ा विवाद
कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के असली गुट को लेकर जारी विवाद अब और गहराता दिखाई दे रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और तृणमूल के बागी खेमे के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली ले जाए जा रहे उनके खेमे के हलफनामे और जरूरी दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई। उनके मुताबिक, सोमवार तड़के हरियाणा सीमा के पास दस्तावेज लेकर जा रहे ट्रक को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास किया गया। ऋतब्रत खेमे ने इस घटना के पीछे ममता बनर्जी समर्थक कालीघाट गुट की भूमिका होने का संदेह जताया है। हालांकि, कालीघाट खेमे ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
सड़क मार्ग से दिल्ली भेजे जा रहे थे दस्तावेज
ऋतब्रत बनर्जी के अनुसार, उनके खेमे के कार्यकर्ता चुनाव आयोग के कार्यालय में जमा करने के लिए हलफनामे और दूसरे जरूरी दस्तावेज लेकर दिल्ली रवाना हुए थे। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उनके खेमे को सड़क मार्ग से दस्तावेज भेजने पड़े, जबकि ममता बनर्जी समर्थक गुट ने चार्टर्ड विमान से अपने कागजात दिल्ली पहुंचाए।
ऋतब्रत ने सोमवार सुबह करीब चार बजे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि तड़के लगभग साढ़े तीन बजे दस्तावेज ले जा रहे ट्रक पर हमला किया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने ट्रक का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और दस्तावेज छीनने की कोशिश की। हालांकि, उनके समर्थकों ने इसका विरोध किया।
ऋतब्रत ने अपने पोस्ट में दोनों खेमों के बीच संघर्ष को संसाधनों की ताकत और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के संकल्प की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि दस्तावेज छीनने की कथित कोशिश सफल नहीं होगी और उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आखरुज्जमान ने भी लगाए गंभीर आरोप
ऋतब्रत खेमे के विधायक आखरुज्जमान ने भी घटना को लेकर कालीघाट गुट पर संदेह जताया। उनका कहना है कि आर्थिक संसाधन सीमित होने के कारण हलफनामे सड़क मार्ग से ट्रक में भेजे जा रहे थे। इसी दौरान हरियाणा सीमा के पास ट्रक को छीनने की कोशिश की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे कालीघाट के तृणमूल खेमे का प्रत्यक्ष समर्थन हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के संबंध में संबंधित पक्षों की ओर से सामने आने वाले तथ्यों और आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
ममता बनर्जी ने पहले ही लगाए थे दबाव बनाने के आरोप
दस्तावेज छीनने की कथित कोशिश का आरोप ऐसे समय में सामने आया है, जब इससे पहले ममता बनर्जी ने हलफनामा जमा करने की प्रक्रिया को लेकर भाजपा और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे।
ममता समर्थक खेमे का दावा है कि ऋतब्रत गुट को फायदा पहुंचाने के लिए भाजपा के इशारे पर काम किया जा रहा है। इस खेमे ने आरोप लगाया है कि स्टांप पेपर पर जबरन हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं और बड़ी संख्या में स्टांप पेपर थानों तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
इन आरोपों के संबंध में ममता खेमे ने 14 अक्टूबर को राज्य के पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा था। इसके अगले दिन मुख्य सचिव को भी पत्र भेजा गया। खेमे ने प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए आगे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
रविवार को ममता बनर्जी ने फिर आरोप लगाया कि भाजपा पैसे और डर का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के जरिए आम लोगों, पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों पर दबाव बनाया जा रहा है। ममता ने कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार दस्तावेज जमा करने हैं, लेकिन कथित तौर पर सरकारी तंत्र के माध्यम से इसमें बाधाएं पैदा की जा रही हैं।
दोला सेन ने ऋतब्रत खेमे के आरोपों को बताया हास्यास्पद
ऋतब्रत खेमे के आरोपों पर ममता समर्थक सांसद दोला सेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सच्चाई, न्याय और जनता ही आखिरकार फैसला करेगी। दोला सेन ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को अपनी सदस्य संख्या साबित करने के लिए पुलिस और प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ता है, उन्हें जनता जवाब देगी। उनके बयान से स्पष्ट है कि दोनों खेमों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बढ़ रहा है।
तृणमूल के असली गुट पर चुनाव आयोग करेगा फैसला
तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को चुनाव आयोग ने फ्रीज कर दिया है। ऐसे में ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों खेमों को यह साबित करना है कि पार्टी पर वास्तविक अधिकार किसका है।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को निर्देश दिया था कि दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामा जमा करें। आयोग को तीन महीने के भीतर इस विवाद पर अंतिम निर्णय लेना है।
अब दस्तावेजों को लेकर लगाए गए ताजा आरोपों ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें और प्रस्तुत दस्तावेज इस बात के लिहाज से अहम होंगे कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न पर किस गुट का दावा मजबूत माना जाता है।































