चुनाव से पहले हाई कोर्ट पहुंचा मामला
कोलकाता : कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के परिसीमन को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया है। कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्डों के नए परिसीमन की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कसबा के एक निवासी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने परिसीमन प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की है। मामले की सुनवाई ऐसे समय में होने जा रही है, जब नवंबर में दोनों नगर निगमों के चुनाव कराए जाने की चर्चा है।
28 अक्टूबर को सुनवाई की संभावना
सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की पूजा अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति आर्यक दत्ता के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील शमीम अहमद ने मामले का उल्लेख किया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी।
मामले पर 28 अक्टूबर को विस्तृत सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, इस पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर है। हालांकि, फिलहाल परिसीमन रद्द करने या चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने का कोई अंतिम न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है।
144 से बढ़कर 209 हुए वार्ड
कोलकाता नगर निगम में पहले कुल 144 वार्ड थे। हालिया परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या बढ़ाकर 209 कर दी गई है। याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति इसी बदलाव की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि वार्डों की नई सीमाएं तय करते समय भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या के अनुपात और प्रशासनिक संतुलन जैसे पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि कुछ वार्डों के क्षेत्रफल और सीमाओं में असंगतियां हैं, जबकि कुछ जगहों पर जनसंख्या के अनुपात के अनुरूप नई व्यवस्था नहीं बनाई गई।
परिसीमन की वैधता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता के वकील शमीम अहमद ने आरोप लगाया कि नए वार्डों के निर्धारण में किसी स्पष्ट और तर्कसंगत नीति का पालन नहीं किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि नगर निगम चुनाव से पहले परिसीमन की कानूनी वैधता और प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच की जाए।
याचिकाकर्ता की मांग है कि यदि प्रक्रिया में कानूनी खामियां पाई जाती हैं, तो अदालत उचित कार्रवाई करे।
नगर निगम चुनाव की तैयारियों पर नजर
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव से पहले इस याचिका ने वार्ड परिसीमन को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यदि अदालत परिसीमन प्रक्रिया में किसी तरह की कानूनी त्रुटि पर विचार करती है, तो उसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल चुनाव कार्यक्रम पर इस मामले के संभावित प्रभाव को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
अब सभी की निगाहें 28 अक्टूबर को होने वाली संभावित सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का रुख यह तय करने में अहम हो सकता है कि परिसीमन को लेकर उठाए गए सवालों पर आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।































