सेना विरोधी टिप्पणी मामले में अरेस्ट वारंट पर 31 अगस्त तक रोक
क्या है पूरा मामला?
तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ भारतीय सेना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में विवादित और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई थी। इसके अलावा तुलसीमाला, बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं पर की गई उनकी टिप्पणियों ने भी विवाद खड़ा कर दिया था।
इसे लेकर कृष्णानगर के निवासी चैना नंदी और 5 अन्य लोगों ने कोर्ट में केस दायर किया। शिकायत में महुआ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने, आपराधिक धमकी और हेट स्पीच की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
कृष्णानगर कोर्ट ने क्यों जारी किया अरेस्ट वारंट?
मामले की सुनवाई कर रहे कृष्णानगर की तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज दिब्येंदु दास ने कहा कि बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद महुआ कोर्ट में पेश नहीं हुईं। यह अदालत के आदेशों की लगातार अवहेलना है।
इसके बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी कर 28 अगस्त तक तामील रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था। महुआ की दलील थी कि समन की पहली दो तारीखें 4 और 12 अगस्त को थीं, तब संसद सत्र चल रहा था और कृष्णानगर बार एसोसिएशन ने कोर्ट का बहिष्कार किया हुआ था, इसलिए पेश होना संभव नहीं था।
हाई कोर्ट ने लगाई अरेस्ट वारंट पर अंतरिम रोक
कृष्णानगर की MP ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सोमवार को जस्टिस देबांग्शु बसाक और जस्टिस आर्यक दत्ता की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। बेंच ने कहा कि सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ 31 अगस्त तक या अगले आदेश तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
वकील ने उठाया अधिकार क्षेत्र का सवाल
MP के वकील अर्क नाग ने कहा, “हमने निचली अदालत द्वारा जारी अरेस्ट वारंट को चुनौती दी है। बेंच ने हमारी याचिका मंजूर कर ली है। शिकायतकर्ता को समन भेजने के लिए कहा गया है। हमारा कहना है कि महुआ मोइत्रा घटना के समय MP थीं और अभी भी MP हैं, इसलिए इस केस की सुनवाई MP-MLA स्पेशल कोर्ट में होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह वारंट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 228 के तहत उनकी छूट की अर्जी पर फैसला किए बिना जारी किया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
सर्किट हाउस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचीं महुआ
फेडरल स्ट्रक्चर का हवाला देकर CJI से की शिकायत
दूसरी तरफ, नादिया सर्किट हाउस छोड़ने के निर्देश को लेकर हुए विवाद में महुआ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने इस घटना का जिक्र किया।
महुआ ने कहा कि यह फेडरल स्ट्रक्चर से जुड़ा मुद्दा है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले वह एक दूसरे मामले में कोर्ट के आदेश पर नादिया के होगलबेरिया पुलिस स्टेशन में पेश होने गई थीं। उसके बाद उन्होंने कृष्णानगर सर्किट हाउस में रात बिताई थी, जहां आरोप है कि प्रशासन ने रात में उन्हें सर्किट हाउस छोड़ने के लिए कहा और परेशान किया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।





























