राहुल गांधी ने कहा, ‘ वोटचोरी, सरकार चोरी के बाद अब दलचोरी ’ ।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी के समर्थन में आवाज उठाई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को तोड़कर उनके चुनाव चिह्न पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में महाराष्ट्र की शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में हुए विभाजन का उल्लेख करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा विवाद से इसकी तुलना की। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर किसी राजनीतिक दल को विभाजित करते हैं और इसके बाद उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।
राहुल ने लिखा कि पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में इसी तरह की स्थिति सामने आई है। उन्होंने इसे ‘वोटचोरी, सरकारचोरी के बाद दलचोरी’ बताया और कहा कि यह लोकतंत्र में गिरावट का संकेत है।
उन्होंने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया। राहुल के अनुसार, आयोग का दायित्व जनता के जनादेश का सम्मान करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके विपरीत आयोग उन शक्तियों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को कमजोर करती हैं।
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के अंत में ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है, बल्कि हर राजनीतिक दल और उस मतदाता की है जो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश
गुरुवार रात चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि फिलहाल तृणमूल कांग्रेस का ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी से जुड़े दोनों गुटों में से किसी को भी इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही ‘सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।
आयोग के अनुसार, फिलहाल ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को सुरक्षित रखा जाएगा। पार्टी पर नियंत्रण, पार्टी की वास्तविक पहचान और चुनावी फंड समेत अन्य संबंधित मुद्दों पर अंतिम फैसला होने के बाद ही चुनाव चिह्न को लेकर निर्णय किया जाएगा।
उपचुनाव से पहले बढ़ी चुनौती
राज्य में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। दोनों पक्षों ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, लेकिन चुनाव चिह्न को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
आयोग ने कहा है कि फिलहाल किसी भी गुट को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता नहीं दी जा रही है। दोनों गुटों को अलग-अलग नाम चुनने होंगे। वे चाहें तो अपने नाम के साथ ‘सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस’ से संबंध का उल्लेख कर सकते हैं।
उपचुनाव में दोनों गुटों को चुनाव आयोग की आरक्षित चुनाव चिह्नों की सूची से अलग-अलग प्रतीक चुनना होगा।
हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न या पार्टी के नियंत्रण को लेकर अंतिम फैसला नहीं है। सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
28 साल बाद ‘जोड़ाफूल’ के बिना चुनाव
तृणमूल कांग्रेस ने 1998 में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। यदि आयोग का अंतरिम आदेश उपचुनाव तक लागू रहता है, तो 2026 में पहली बार पश्चिम बंगाल में ऐसा विधानसभा चुनाव होगा, जिसमें तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
विपक्षी नेताओं ने भी किया समर्थन
चुनाव आयोग के आदेश के बाद कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी ममता बनर्जी के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन का ‘उपहार’ बताया।
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी ममता बनर्जी के समर्थन में टिप्पणी की और चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर आपत्ति जताई है।
इस बीच, चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के सामने उपचुनाव से पहले नए नाम और चुनाव चिह्न की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी कर दी है। अंतिम फैसला आने तक पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर विवाद जारी रहने की संभावना है।































