बर्दवान-बांकुड़ा-बीरभूम पर भी नजर
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में पर्यटन के विकास को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्य में परियोजनाओं को मंजूरी देने, वित्तीय सहायता और भविष्य की योजनाओं को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। लोकसभा में सांसद डॉ. शर्मिला सरकार द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों की पहचान, विकास और प्रचार-प्रसार की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन की होती है।
वित्तीय सहायता
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय स्वदेश दर्शन (Swadesh Darshan), स्वदेश दर्शन 2.0, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (CBDD) और PRASHAD जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों को पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
बर्दवान, बांकुड़ा और बीरभूम के पर्यटन स्थलों पर जोर
सांसद शर्मिला सरकार ने विशेष रूप से बर्दवान, बांकुड़ा और बीरभूम जिलों में विरासत और पर्यटन क्षमता के संरक्षण, पुनरुद्धार और प्रचार से जुड़े पिछले पांच वर्षों के पर्यटन प्रोजेक्ट्स की जानकारी मांगी थी।
परियोजना को मंजूरी
मंत्रालय ने बताया कि किसी परियोजना को मंजूरी देना एक सतत प्रक्रिया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों का संबंधित योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है। इसके बाद उपलब्ध धनराशि और अन्य प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं पर फैसला लिया जाता है।
स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत मांगे गए प्रस्ताव
सरकार के मुताबिक स्वदेश दर्शन 2.0 पोर्टल खोला गया है और सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से पर्यटन विकास से जुड़े प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। पश्चिम बंगाल से प्राप्त पात्र प्रस्तावों पर भी योजना के मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार विचार किया जाएगा।
परियोजनाओं की मंजूरी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), योजना के दिशा-निर्देशों का पालन, उपलब्ध बजट और सरकार की प्राथमिकताओं समेत कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
राज्य की भूमिका अहम
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में पर्यटन स्थलों के विकास और प्रचार-प्रसार में राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। केंद्र की योजनाओं के जरिए राज्य को आवश्यक वित्तीय सहायता दी जाती है, लेकिन परियोजनाओं का चयन और प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से भेजे जाने पर ही आगे बढ़ता है।





























