डोली में आई तकनीकी खराबी; सभी सुरक्षित निकाले गए
कोलकाता : पश्चिम बर्धमान के पांडवेश्वर स्थित कुमारडीही कोयला खदान में सोमवार को बड़ा हादसा टल गया। खदान के अंदर मजदूरों को लाने-ले जाने वाली डोली में तकनीकी खराबी आने के कारण 12 श्रमिक करीब 13 घंटे तक फंसे रहे। मंगलवार सुबह लगभग 6 बजे सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। खदान प्रबंधन के अनुसार, सभी मजदूरों की हालत ठीक है। एहतियातन उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है।
डोली में खराबी से खदान के अंदर फंसे मजदूर
जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के पांडवेश्वर स्थित कुमारडीही कोयला खदान में सोमवार को 12 मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान खदान के अंदर आने-जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डोली में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इसके कारण डोली करीब 150 फीट नीचे बीच रास्ते में ही फंस गई।
फंसे हुए मजदूरों में चार ऐसे थे, जो काम खत्म करने के बाद खदान से बाहर निकलने के लिए ऊपर आ रहे थे। वहीं, आठ मजदूर खदान के अंदर काम कर रहे थे। डोली के अचानक रुक जाने से सभी की आवाजाही बाधित हो गई और वे अंदर ही फंस गए।
रातभर चला बचाव अभियान, सुबह मिली सफलता
घटना के बाद मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रयास शुरू किए गए। हालांकि, रातभर कोशिशों के बावजूद तत्काल सभी को बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। इससे खदान के अंदर फंसे श्रमिकों की सुरक्षा और उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई।
मंगलवार तड़के बचाव कार्य में तेजी लाई गई। आखिरकार सुबह करीब 6 बजे सभी 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
खदान प्रबंधन ने बताया कि सभी श्रमिक सुरक्षित हैं और उनकी हालत सामान्य है। हालांकि, एहतियात के तौर पर उनकी चिकित्सकीय जांच कराने के लिए उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी पहुंचे मौके पर
घटना की जानकारी मिलने के बाद पांडवेश्वर के भाजपा विधायक जितेंद्र तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयासों का जायजा लिया।
विधायक ने कहा कि बचाव अभियान पूरा होने के बाद यह जांच की जानी चाहिए कि घटना किसकी लापरवाही से हुई। उन्होंने दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उनके मुताबिक, रात के दौरान खदान के अंदर फंसे मजदूरों के लिए भोजन और पीने का पानी भेजा गया था। अंदर मौजूद श्रमिकों की ओर से जवाब भी मिल रहा था, जिससे उनके सुरक्षित होने की जानकारी मिलती रही।
डोली में बार-बार खराबी आने पर उठे सवाल
इस घटना के बाद खदान में इस्तेमाल होने वाली डोली की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ खदान श्रमिकों का दावा है कि डोली में तकनीकी खराबी आने की घटनाएं पहले भी होती रही हैं। कभी तकनीकी गड़बड़ी के कारण डोली बीच रास्ते में रुक जाती है, तो कभी उसकी रस्सी टूटने जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं।
श्रमिकों के एक वर्ग ने सवाल उठाया कि यदि इस तरह की समस्याएं बार-बार सामने आ रही हैं, तो उन्हें रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि खदान के भीतर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए परिवहन व्यवस्था का नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है।
विधायक जितेंद्र तिवारी ने भी श्रमिकों की शिकायतें सुनीं। वहीं, नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर एक खदान अधिकारी ने बताया कि डोली में तकनीकी खराबी आने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। फिलहाल सभी 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, इस घटना ने खदानों में सुरक्षा इंतजामों, उपकरणों के रखरखाव और संभावित लापरवाही की जांच की जरूरत को फिर से सामने ला दिया है।































