मतदाता सूची तैयार करने में जुटा आयोग
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। नवंबर के आखिरी सप्ताह में मतदान कराने की संभावना अब कमजोर पड़ती दिख रही है। वार्डों के परिसीमन के बाद बूथवार मतदाता सूची तैयार करने में राज्य चुनाव आयोग को परेशानी हो रही है। ऐसे में 7 दिसंबर तक दोनों नगर निगमों में नई निर्वाचित बोर्ड का गठन करने का लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है।
वार्डों के परिसीमन के बाद बढ़ी परेशानी
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कोलकाता नगर निगम के वार्डों का पुनर्गठन किया गया है। पहले यहां 144 वार्ड थे, जिनकी संख्या बढ़ाकर 209 कर दी गई है। इस बदलाव के कारण कई मतदाताओं के वार्ड बदल गए हैं। इसके साथ ही कुछ मतदान केंद्रों की व्यवस्था में भी बदलाव करना पड़ा है।
अब राज्य चुनाव आयोग को नए वार्डों की सीमाओं के अनुसार मतदाताओं के नाम और उनके संबंधित मतदान केंद्रों की जानकारी व्यवस्थित करनी है। इसके बाद ही मसौदा मतदाता सूची तैयार कर प्रकाशित की जा सकेगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह काम अनुमान से अधिक समय ले रहा है।
3 नवंबर तक मतदाता सूची जारी होने पर संशय
आयोग के सूत्रों के मुताबिक, मतदाता सूची तैयार करने के लिए सबसे पहले भारत निर्वाचन आयोग से मतदाताओं का डेटाबेस लेना होता है। राज्य चुनाव आयोग ने इसके लिए पहले 1 जुलाई को आधार मानकर आंकड़े मांगे थे। आंकड़े मिलने के बाद भी नए वार्डों और बूथों के अनुसार उनका मिलान करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
कोलकाता नगर निगम में करीब 4,500 मतदान केंद्र हैं। इनमें से लगभग 100 बूथों के पुनर्गठन की जरूरत पड़ी है। हालांकि, बूथों की संख्या में सीमित बदलाव के बावजूद नए वार्डों की सीमाओं के अनुरूप मतदाताओं की पहचान कर सूची तैयार करने में काफी समय लग रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग के सामने 3 नवंबर तक मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित करने का लक्ष्य था। लेकिन निर्धारित समय में काम पूरा होने को लेकर संशय है। इससे पहले भी आयोग दो बार समयसीमा बढ़ा चुका है।
BLO पर काम का दबाव, चुनावी तैयारी प्रभावित
मतदाता सूची तैयार करने के काम में कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ी चुनौती बन रही है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) फिलहाल जनगणना संबंधी काम में व्यस्त हैं। नगर निगम चुनाव के लिए उनकी जिम्मेदारियां तय करने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है।
त्योहारों के दौरान भी मतदाता सूची तैयार करने का काम जारी रखना पड़ा। इसके बावजूद आयोग को नई वार्ड सीमाओं के अनुसार आंकड़ों का मिलान करने में परेशानी हो रही है।
इसी बीच राज्य चुनाव आयोग ने भारत निर्वाचन आयोग से 1 अक्टूबर तक के मतदाता आंकड़ों वाला डेटाबेस मांगा है। यह जानकारी मिलने के बाद भी सूची तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने में अतिरिक्त समय लग सकता है।
2 नवंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी करने की योजना
प्रशासनिक योजना के अनुसार, 2 नवंबर को नगर निगम चुनाव की अधिसूचना जारी करने की तैयारी थी। लेकिन मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने और चुनाव से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने में देरी होने पर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाना पड़ सकता है।
चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद उम्मीदवारों को प्रचार के लिए कम से कम तीन सप्ताह का समय देने की जरूरत होगी। ऐसे में नवंबर के अंतिम सप्ताह में मतदान कराना मुश्किल माना जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, दिसंबर से पहले चुनाव कराना भी कठिन हो सकता है।
हालांकि, चुनाव की तारीख को लेकर अंतिम फैसला राज्य चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
7 दिसंबर तक नए बोर्ड के गठन का लक्ष्य प्रभावित?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के एक कार्यक्रम में कहा था कि 7 दिसंबर तक प्रशासक का कार्यकाल समाप्त कर निर्वाचित नगर निगम बोर्ड को जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। इसी समयसीमा को ध्यान में रखकर शहरी विकास विभाग और राज्य चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू की थीं।
लेकिन मतदाता सूची तैयार करने में देरी के कारण अब इस लक्ष्य को हासिल करने पर सवाल उठने लगे हैं। यदि नवंबर में चुनाव नहीं हो पाता है, तो मतदान, मतगणना और नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया दिसंबर तक खिंच सकती है।
फिलहाल कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनाव की तारीखों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब सबकी नजर मतदाता सूची के प्रकाशन और राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले पर है।































