देशभर में BJP का प्रदर्शन, कोलकाता में भी विरोध
कोलकाता : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, रांची, पटना, लखनऊ और जम्मू समेत देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा ने खड़गे से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। इस विवाद की गूंज कोलकाता में भी सुनाई दी, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया।
पटना की सभा में टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक सभा के दौरान शुरू हुआ। सभा में भाषण देते समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कथित तौर पर कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनका यह बयान सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खड़गे की टिप्पणी की आलोचना की। भाजपा ने कांग्रेस पर राजनीतिक दिवालियापन का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
दिल्ली से जम्मू तक सड़कों पर उतरे भाजपा कार्यकर्ता
खड़गे की टिप्पणी के विरोध में सोमवार सुबह से ही भाजपा कार्यकर्ता अलग-अलग शहरों में सड़कों पर उतर आए। दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आवास के नजदीक प्रदर्शन किया। राजाजी मार्ग पर निकाली गई रैली में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के समर्थन में नारे लगाए और पोस्टर लेकर विरोध जताया।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि जरूरी है।
बिहार के पटना में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने खड़गे के खिलाफ नारेबाजी की। जम्मू के डोगरा चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं और युवा मोर्चा के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ समय के लिए सड़क जाम होने की भी खबर है।
बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित विरोध सभा में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। वहां भी प्रदर्शन के दौरान कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। रांची और लखनऊ समेत अन्य शहरों में भी भाजपा ने विरोध प्रदर्शन किया।
कोलकाता में विक्टोरिया हाउस के सामने प्रदर्शन
खड़गे के बयान के खिलाफ कोलकाता में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। सोमवार दोपहर विक्टोरिया हाउस के सामने भाजपा समर्थक जुटे और कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा के उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष तमोघ्न घोष ने किया।
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष की तस्वीर को लेकर भी विरोध प्रदर्शन किया गया। तमोघ्न घोष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी करना कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। पार्टी ने कांग्रेस से अपने अध्यक्ष के बयान पर स्पष्टीकरण देने की भी मांग की।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया मुद्दे को बढ़ाने का आरोप
भाजपा के देशव्यापी प्रदर्शन के बीच कांग्रेस की ओर से भी पलटवार किया गया। कर्नाटक सरकार में मंत्री और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे ने भाजपा पर विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने का आरोप लगाया।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि भाजपा किसी मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना पसंद करती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब अतीत में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ टिप्पणियां की थीं, तब इसी तरह की नाराजगी क्यों नहीं दिखाई गई।
मनोज झा बोले—विरोध में चयनात्मक रवैया नहीं होना चाहिए
इस विवाद पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे से इस तरह की टिप्पणी की अपेक्षा नहीं थी। हालांकि, उन्होंने भाजपा नेताओं की ओर से अतीत में सोनिया गांधी और खड़गे के खिलाफ की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया।
मनोज झा ने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी के मामलों में विरोध का रवैया चयनात्मक नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी टिप्पणी पर आपत्ति जताई जाती है, तो समान परिस्थितियों में सभी नेताओं के बयानों पर एक जैसा दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। फिलहाल खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा माफी की मांग पर अड़ी है, जबकि कांग्रेस की ओर से भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए विवाद को तूल देने का आरोप लगाया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की राजनीति में नेताओं की भाषा और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है।































