इंटर्न डॉक्टरों को स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों की ड्यूटी को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप कर रहे कुछ डॉक्टर पैसे लेकर अपनी ड्यूटी दूसरे लोगों से करवाते हैं। कहीं पूरे दिन की ड्यूटी के लिए सौदा होता है, तो कहीं आठ घंटे या रोजाना कुछ घंटों की जिम्मेदारी दूसरे को सौंप दी जाती है। इतना ही नहीं, आरोप है कि ड्यूटी करने वाला व्यक्ति हाजिरी रजिस्टर में किसी दूसरे डॉक्टर के नाम से हस्ताक्षर करता है। इस कथित ‘प्रॉक्सी ड्यूटी सिंडिकेट’ को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय ने नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा है कि डॉक्टरों को खुद को सुधारने का मौका दिया जा रहा है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
बायोमेट्रिक हाजिरी होगी अनिवार्य
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रॉक्सी ड्यूटी की शिकायतों को रोकने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य करने की तैयारी है। आरोप है कि राज्य के लगभग सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में, दो संस्थानों को छोड़कर, इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं।
मंत्री का दावा है कि पिछले तीन वर्षों से विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में ड्यूटी के बदले पैसे लेने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। इस व्यवस्था में केवल इंटर्न ही नहीं, बल्कि कुछ सीनियर रेजिडेंट और हाउस स्टाफ के शामिल होने की शिकायतें भी मिली हैं।
यदि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर की पहचान और उपस्थिति का रिकॉर्ड सही नहीं है, तो इससे अस्पतालों में कामकाज और मरीजों की देखभाल पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
ड्यूटी के लिए बना व्हाट्सऐप ग्रुप, घंटे के हिसाब से तय होती है रकम
इस मामले में एक विशेष व्हाट्सऐप ग्रुप का भी जिक्र सामने आया है। आरोप है कि इंटर्न डॉक्टर इस ग्रुप के माध्यम से अपनी ड्यूटी दूसरे लोगों को सौंपने के लिए आपस में संपर्क करते हैं।
बताया जा रहा है कि ग्रुप में सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार की ड्यूटी करने के बदले अच्छी रकम मिलने की बात कही जाती है। कुछ लोग रोजाना दो घंटे की ड्यूटी भी दूसरे व्यक्ति को सौंपने की पेशकश करते हैं।
आरोपों के मुताबिक, ड्यूटी की अवधि और समय के आधार पर रकम तय होती है। कहीं प्रति घंटे 200 रुपये, तो कहीं 250 रुपये तक देने की बात सामने आई है।
तीन साल से चल रहा था कथित खेल
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखोपाध्याय का दावा है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह प्रवृत्ति पिछले तीन वर्षों से जारी है। उन्होंने इस मामले को राज्य के मेडिकल संस्थानों में पहले सामने आए कथित ‘थ्रेट कल्चर’ से भी जोड़कर देखा है।
मंत्री के अनुसार, शिकायतें केवल इंटर्न डॉक्टरों तक सीमित नहीं हैं। कुछ सीनियर रेजिडेंट और हाउस स्टाफ के भी पैसे लेकर ड्यूटी बदलने की जानकारी मिली है।
दूसरे संस्थानों के लोगों से ड्यूटी कराने का भी आरोप
स्वास्थ्य मंत्री ने मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज में डेंटल साइंस से जुड़े लोगों को कथित तौर पर पैसे देकर ड्यूटी करवाने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा, कुछ मेडिकल कॉलेजों में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा से जुड़े लोगों से एमबीबीएस इंटर्न की ड्यूटी करवाने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही गई है।
मंत्री ने यह भी दावा किया कि कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े लोग दूसरे सरकारी संस्थानों में ड्यूटी करते हैं। त्योहारों, खासकर दुर्गापूजा के दौरान, अधिक पैसे देकर ड्यूटी करवाने की प्रवृत्ति होने की बात भी सामने आई है।
इन आरोपों की जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन संस्थानों में इस तरह की गतिविधियां हुई हैं और कौन-कौन इसमें शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्री का संदेश: अब नहीं मिलेगी छूट
मामले पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों को चेतावनी दी है कि उन्हें अपनी कार्यप्रणाली सुधारने का अवसर दिया जा रहा है। लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति और ड्यूटी की जिम्मेदारी सीधे मरीजों के इलाज से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि किसी डॉक्टर की जगह कोई दूसरा व्यक्ति बिना उचित अनुमति के ड्यूटी करता है और गलत नाम से हाजिरी दर्ज होती है, तो यह अस्पताल की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि बायोमेट्रिक हाजिरी लागू करने और कथित प्रॉक्सी ड्यूटी पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाता है।































