दिव्यांगों की सहायता एहसान नहीं नैतिक कर्तव्य : बनवारी लाल सोती
कोलकाता : ” जहां हम धरती से आसमान तक को नाप रहे हैं सूरज-चांद तक अपनी पहुंच बना रहे हैं, वहीं अगर आज भी हमारे समाज में दैहिक विकलांगता के कारण किसी को उपेक्षित, मजबूर और जिल्लत भरा जीवन जीना पड़े तो यह हम सभी समर्थ और सम्पन्न लोगों के लिए बेहद ही शर्म की बात है।”
ये उद्गार शहर के स्वनामधन्य सामाजिक संस्थान “सोती चैरिटेबल ट्रस्ट” के मुख्य न्यासी सुपरिचित समाजसेवी बनवारी लाल सोती ने ट्रस्ट की प्रेरणास्रोत व अनासक्त समाजसेविका दिवंगत सत्यभामा सोती की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में दिव्यांगों को सचल-सक्रिय बनाने के उद्देश्य से आयोजित सप्ताह व्यापी “कृत्रिम पैर व कैलिपर वितरण शिविर” के समापन अवसर पर आज कोलाघाट के राधा माधव मंदिर प्रांगण में व्यक्त किये। उन्होंने दिव्यांग जनों की सेवा को परम नैतिक कर्तव्य का निर्वाह बताते हुए कहा कि सेवा के लिए केवल धन से बात नहीं बनेगी, इसके लिए मन और तन दोनों तैयार होने चाहिए जिसके लिए आज की युवा पीढ़ी में परोपकार के संस्कार डालने जरूरी हैं।
महावीर सेवा सदन के वरिष्ठ सदस्य श्रीकृष्ण तुलस्यान ने कहा कि दिव्यांग जनों की सेवा से महान पावन पुनीत कार्य कोई हो नहीं सकता क्योंकि ऐसा करके हम न केवल एक अचल को सचल बना रहे हैं अपितु उसके और परिवार को फिर से गुलजार कर अपने परम नैतिक कर्तव्य का निर्वाह कर रहे हैं। ट्रस्ट के सेवाकार्य समन्वयक अनुपम शर्मा ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से आयोजित यह पंचम कृत्रिम अंग-प्रत्यंग वितरण शिविर गत 24 अगस्त से चल रहा है जिसका आयोजन महावीर सेवा सदन के विशेष तकनीकी सहयोग से कोलाघाट के मेदिनीपुर के अन्यतम सवंयसेवी संगठन ‘संकेत क्लब, कोलाघाट ‘ की देखरेख में आयोजित इस शिविर के माध्यम से पूरे राज्य से आये 133 दिव्यांग लोगों को उनकी आवश्यकतानुसार कृत्रिम पैर एवं हाथ और अन्य उपकरण पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध प्रदान किए गए हैं।
शिविर संयोजक महावीर सेवा सदन के तकनीशियन कौलिक घोराई ने बनवारी लाल सोती जी के मानवीय संवेदनाओं को नमन करते हुए कहा कि कोलकाता से कोसों दूर सोती चैरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले मानव सेवा के इस महान यज्ञ से सैकड़ों लोगों के जीवन को जिस तरह गुलजार किया है उसके लिए कृतज्ञता की कोई परिभाषा नहीं है। शिविर की सफलता में संकेत क्लब के नकुल दास, पार्थो घोष, संटू हाजरा, शुभांकर बसु, कल्याण सामंत का सक्रिय सहयोग रहा।





























