रात 8 से 10 बजे तक ही जलेंगे ग्रीन पटाखे
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में दिवाली और छठ पूजा के दौरान पटाखे जलाने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य में त्योहारों के दौरान केवल ग्रीन पटाखे जलाने और उनके इस्तेमाल के लिए निर्धारित समय का पालन करने पर जोर दिया गया है। होम सेक्रेटरी संघमित्रा घोष ने बताया कि पटाखे जलाने की अनुमति रात 8 बजे से 10 बजे तक रहेगी। यानी लोग इस दो घंटे की निर्धारित अवधि में ही ग्रीन पटाखे जला सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य त्योहारों की खुशियों को बरकरार रखते हुए वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखना है। दिवाली और छठ पूजा के दौरान पटाखों के इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए प्रशासन लोगों से नियमों का पालन करने की अपील कर रहा है।
समय सीमा का पालन करना जरूरी
होम सेक्रेटरी संघमित्रा घोष ने स्पष्ट किया कि पटाखे जलाने के लिए समय सीमा का पालन करना जरूरी होगा। निर्धारित समय के बाहर पटाखे जलाने से संबंधित नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। इसलिए लोगों को त्योहार मनाने से पहले प्रशासन के निर्देशों की जानकारी रखने की सलाह दी गई है।
दिवाली की रात पटाखे जलाने को लेकर अक्सर समय सीमा और ध्वनि प्रदूषण का मुद्दा उठता है। देर रात तक पटाखे फोड़ने से बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और पालतू जानवरों को परेशानी होती है। इसके अलावा पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। ऐसे में निर्धारित समय का पालन करना महत्वपूर्ण है।
केवल ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर
प्रशासन ने ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों को प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। हालांकि, इनसे भी धुआं और आवाज निकल सकती है। इसलिए इन्हें पूरी तरह प्रदूषण मुक्त मानना सही नहीं होगा।
ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करते समय लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उत्पाद प्रमाणित हो और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। प्रतिबंधित पटाखों या अधिक ध्वनि पैदा करने वाले पटाखों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
प्रशासन की ओर से लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे त्योहार के दौरान पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखें। पटाखों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए भी सावधानी बरतनी चाहिए।
छठ पूजा के दौरान भी नियमों के पालन पर जोर
दिवाली के अलावा छठ पूजा के दौरान भी पटाखों के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियम महत्वपूर्ण होंगे। पश्चिम बंगाल में छठ पूजा बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। इस अवसर पर घाटों और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। ऐसे में पटाखों के इस्तेमाल से भीड़भाड़ वाले स्थानों पर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, घाटों पर व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय रहते हैं। लोगों से अपील है कि वे पूजा स्थलों, जलाशयों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पटाखे जलाने से बचें तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
नियमों के उल्लंघन से बचने की अपील
त्योहारों के दौरान पटाखों को लेकर लागू नियमों का पालन करना नागरिकों की जिम्मेदारी भी है। लोगों को पटाखे खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और प्रमाणन की जांच करनी चाहिए। बच्चों को पटाखे जलाते समय अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और आग से बचाव के लिए पानी या रेत की व्यवस्था रखनी चाहिए।
प्रशासन के निर्देशों के अनुसार रात 8 बजे से 10 बजे तक की निर्धारित अवधि में ही ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। लोगों से अपील है कि वे दिवाली और छठ पूजा को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तरीके से मनाएं।
त्योहारों की खुशी तभी सार्थक होगी, जब उसका असर दूसरों की सेहत, सुरक्षा और पर्यावरण पर कम से कम पड़ेगा।































