परिसीमन पर हाई कोर्ट का सवाल, क्या नियमों का पालन हुआ?
कोलकाता : कोलकाता नगर निगम के वार्डों के परिसीमन को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने की प्रक्रिया को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने परिसीमन की प्रक्रिया और नगर निगम आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य ने पूछा कि वार्डों के पुनर्गठन के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के पीछे क्या निर्धारित नियम हैं और क्या कानून के अनुसार सभी कदम उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होने की बात कही गई है।
परिसीमन को चुनौती देने के लिए अदालत पहुंचे कसबा निवासी
कोलकाता के कसबा इलाके के एक निवासी ने नगर निगम के वार्डों के परिसीमन की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वार्डों के पुनर्गठन की प्रक्रिया जल्दबाजी में और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना पूरी की गई।
बुधवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से भी अदालत में पक्ष प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह सवाल उठाया कि जब परिसीमन की प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी, तो याचिकाकर्ता ने इतने देर बाद अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया।
राज्य सरकार ने कहा—मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं
राज्य के महाधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि यह मामला अवकाशकालीन पीठ में तत्काल सुनवाई के योग्य नहीं है। उनके मुताबिक, 22 अगस्त को मसौदा कार्यक्रम प्रकाशित किए जाने के समय याचिकाकर्ता की ओर से कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि किसी राजनीतिक दल ने भी उस समय परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति नहीं जताई थी। इसी आधार पर सरकार ने अदालत से कहा कि मामले की तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील विकासरंजन भट्टाचार्य ने इसका जवाब देते हुए कहा कि निर्णय और उससे जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ही उन्होंने अदालत का रुख किया। उन्होंने परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को तर्कहीन बताते हुए नगर निगम प्रशासक के अधिकारों पर भी सवाल उठाए।
144 से बढ़ाकर 209 वार्ड करने पर विवाद
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कोलकाता नगर निगम में पहले 144 वार्ड थे। इसके बाद 5 अगस्त को वार्डों की संख्या और पुनर्गठन से संबंधित संशोधन की सिफारिश की गई तथा 7 अगस्त को राज्यपाल ने विधेयक को मंजूरी दी।
इसके बाद 22 अगस्त को संबंधित विषय मुख्य सचिव के पास भेजा गया और आपत्तियां आमंत्रित की गईं। याचिकाकर्ता के वकील ने इस प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य सचिव निर्वाचित सरकार से ऊपर नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के पुनर्गठन के पीछे राजनीतिक लाभ हासिल करने का उद्देश्य हो सकता है। हालांकि, यह याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है; अदालत ने अभी इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
नगर निगम आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य ने यह जानना चाहा कि नगर निगम आयुक्त ने जिस तरीके से वार्डों के पुनर्गठन का प्रस्ताव भेजा, उसके लिए क्या कोई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया है।
अदालत का सवाल इस बात पर केंद्रित था कि परिसीमन के प्रस्ताव को तैयार करने और आगे बढ़ाने में संबंधित अधिकारियों ने नियमों का पालन किया या नहीं।
याचिकाकर्ता के एक अन्य वकील शमीम अहमद ने अदालत को बताया कि 5 अगस्त को जारी अधिसूचना में 209 वार्डों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ता पक्ष ने इस मामले में अंतरिम आदेश देने की मांग भी की है, ताकि विवादित प्रक्रिया पर अदालत विचार कर सके।
गुरुवार की सुनवाई पर टिकी नजरें
कोलकाता नगर निगम के वार्डों के परिसीमन से जुड़ा यह मामला आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ता जहां प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने सुनवाई की तात्कालिकता पर आपत्ति जताई है।
अब गुरुवार को होने वाली सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि हाई कोर्ट परिसीमन की प्रक्रिया पर कोई अंतरिम निर्देश देता है या नहीं। फिलहाल, वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने के फैसले को लेकर कानूनी विवाद जारी है और अदालत के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।































