4 हफ्ते में सुनवाई पूरी और 3 महीने में फैसला
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ाफूल’ को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग के लिए समयसीमा तय कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों प्रतिद्वंद्वी खेमों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी pleadings और दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर पूरा करने को कहा। इसके बाद चुनाव आयोग को विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा।
इस तरह मामले में तत्काल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाद के गुण-दोष पर उसने कोई राय नहीं दी है और दोनों पक्ष अपने सभी दावे चुनाव आयोग के सामने रख सकते हैं।
चार सप्ताह में पूरी करनी होगी दोनों पक्षों की सुनवाई
सोमवार की सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी खेमे की ओर से कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी ने चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद का जल्द समाधान करने की मांग की। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी खेमे की ओर से मुकुल रोहतगी ने चुनाव आयोग के सामने पक्ष रखने के लिए अधिक समय की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा को संतुलित रखते हुए दोनों पक्षों को चार सप्ताह में अपनी pleadings पूरी करने का निर्देश दिया। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर अंतिम निर्णय लेना होगा।
चुनाव आयोग ने पहले ही ‘जोड़ाफूल’ किया है फ्रीज
इस विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के 17 सितंबर के अंतरिम आदेश से हुई। आयोग ने ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया था। दोनों गुटों को आगामी उपचुनावों के लिए अलग नाम और चुनाव चिह्न लेने को कहा गया था।
इसके बाद आयोग ने ममता बनर्जी के खेमे को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया। वहीं दूसरे खेमे को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया। ये व्यवस्थाएं संबंधित उपचुनावों के लिए अंतरिम हैं।
नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव में अलग पहचान
6 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के कारण इन चुनावों में दोनों गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मूल पार्टी नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार का फैसला चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा। तब तक दोनों पक्षों को अंतरिम नाम और प्रतीकों के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा।
बैंक खातों और पार्टी संपत्तियों का विवाद भी जुड़ा
पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के अलावा दोनों गुटों के बीच पार्टी के बैंक खातों और वित्तीय संसाधनों को लेकर भी विवाद चल रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे को अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी के माध्यम से कुछ जमे हुए खातों से दैनिक संचालन के लिए धन निकालने का रास्ता दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समयसीमा से इस पूरे विवाद में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है। अगले चार सप्ताह में दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने अपने दावे और दस्तावेज रखेंगे और उसके बाद आयोग तीन महीने के भीतर यह तय करेगा कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न पर अधिकार किसे मिलेगा।
































