दिल्ली-महाराष्ट्र में दावा-आपत्ति की समयसीमा बढ़ी; BLO घर-घर जाकर लेंगे दस्तावेज
नई दिल्ली : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने अहम फैसले किए हैं। निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. एस. एस. संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई बैठक में मतदाताओं की सुविधा, दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया और दावा-आपत्ति की समयसीमा को लेकर कई निर्णय लिए गए। चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में SIR-2026 की प्रक्रिया और अलग-अलग राज्यों के कार्यक्रम दर्ज हैं।
नोटिस पाने वालों के घर जाएंगे BLO
आयोग के अनुसार SIR के दौरान जिन मतदाताओं को अनमैप्ड होने या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किए गए हैं, उनके घर अब बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जाएंगे। BLO संबंधित मतदाता से जरूरी दस्तावेज लेकर उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे, ताकि संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) आगे फैसला ले सकें।
ऐसे मामलों में सामान्य तौर पर मतदाता को ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ERO के निर्णय के आधार पर सुनवाई होगी। आयोग ने कहा कि जहां संभव हो, सुनवाई ऑनलाइन कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी मतदाता की ओर से सुनवाई में शामिल हो सकेगा।
गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष कैंप
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को रैन बसेरों, मजदूर बस्तियों और गरीब एवं बेघर लोगों के लिए जरूरत के मुताबिक हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य SIR प्रक्रिया में ऐसे लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिन्हें दस्तावेज जमा करने या आवेदन की प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ी दावा-आपत्ति की तारीख
बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र के SIR कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। दिल्ली में दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। वहीं नोटिस और दावा-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक कर दी गई है।
महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति दाखिल करने की अवधि 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई गई है। यहां इनके निपटारे की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 तय की गई है।
ECINet सिस्टम की होगी समीक्षा
आयोग ने ECINet सिस्टम की भी समीक्षा करने का फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। समिति यह जांच करेगी कि सिस्टम में अधिकारियों की भूमिका और पहुंच संबंधित कानूनों एवं नियमों के अनुरूप है या नहीं।
Form 6 को लेकर आयोग का स्पष्टीकरण
आयोग ने कहा कि SIR के लिए Form 6 के साथ दी जाने वाली घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित संबंधित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR-2026 के लिए Form 6 और संबंधित घोषणा की सुविधा उपलब्ध है।
SIR पूरा होने के बाद भी नाम जोड़ने का विकल्प
आयोग ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। आयोग के मुताबिक, जिन लोगों का नाम SIR के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची में छूट गया है, वे निरंतर अपडेट प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी शामिल हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीतिगत मामले से संबंधित नहीं था। आयोग के अनुसार SIR का आदेश 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सर्वसम्मति से जारी किया गया था।
































