उत्तर बंगाल और जंगलमहल पर रहेगा विशेष फोकस
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से राज्य सरकार नई औद्योगिक एवं प्रोत्साहन नीति (Industrial & Incentive Policy) लाने की तैयारी में है। इस नीति को बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, नई नीति में पश्चिम बंगाल के पश्चिमी क्षेत्रों यानी पश्चिमांचल और उत्तर बंगाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की योजना है।
रोजगार के आधार पर मिलेगा औद्योगिक प्रोत्साहन
नई औद्योगिक नीति की सबसे अहम विशेषता यह होगी कि कंपनियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाएं रोजगार सृजन के आधार पर तय की जा सकती हैं। नीति के तहत बिजली शुल्क में छूट और राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) में रियायत जैसे प्रावधान शामिल होंगे।सरकार का उद्देश्य ऐसी औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करना है, जो राज्य में निवेश के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करें।
उत्तर बंगाल और जंगलमहल में निवेश को प्राथमिकता
राज्य सरकार पश्चिम बंगाल के उन क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति देना चाहती है, जहां निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। इसके तहत उत्तर बंगाल के साथ पश्चिमांचल क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। निवेश की मात्रा और जरूरत के आधार पर सरकार औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विचार करेगी।
पिछली सरकार की नीति से अलग होगी नई व्यवस्था
रिपोर्ट के अनुसार, नई प्रोत्साहन नीति का पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की औद्योगिक प्रोत्साहन व्यवस्था से सीधा संबंध नहीं होगा। नई नीति को तैयार करने की प्रक्रिया में मंत्रियों के समूह की मंजूरी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के स्तर पर विचार-विमर्श तथा कानूनी जांच सहित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गई हैं।उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तापस राय ने भी नई औद्योगिक एवं प्रोत्साहन नीति को बुधवार को कैबिनेट के समक्ष पेश किए जाने की पुष्टि की है।
2025 के प्रोत्साहन विवाद के बाद अहम कदम
पश्चिम बंगाल में औद्योगिक प्रोत्साहनों को लेकर वर्ष 2025 में विवाद खड़ा हुआ था। उस समय पिछली सरकार ने औद्योगिक सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों को पूर्वव्यापी प्रभाव से रद्द करने संबंधी कानून पारित किया था। इसके बाद कई बड़ी औद्योगिक कंपनियों ने कलकत्ता हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी।इन कंपनियों में हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और डालमिया सीमेंट जैसी कंपनियां शामिल थीं।
ऐसे में नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को राज्य में निवेश का माहौल मजबूत करने, उद्योग जगत का भरोसा बढ़ाने और दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अब सभी की नजर बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक पर है। कैबिनेट की मंजूरी और नीति के आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही प्रोत्साहनों की पात्रता, शर्तों और लाभों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।






























