श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन धूमधाम से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ के जयकारों से गूंजा सभागार
कोलकाता: मनुष्य जीवन में धन-संपत्ति, गाड़ी, मकान और कारोबार अर्जित करता है, लेकिन उसके जाने के बाद ये चीजें याद नहीं रखी जातीं। समाज के लिए उसने क्या योगदान दिया, यही उसकी वास्तविक पहचान बनता है। पुण्य कभी नष्ट नहीं होता, जबकि पैसा नष्ट हो सकता है। यह बात राष्ट्रीय संत एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (अयोध्या) के महासचिव स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज ने कही।
गोलाघाटा स्थित डीबीनीटी पैवेलियन (वीआईपी रोड) में श्री दाधीच परिषद (कोलकाता) के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर नजर आए। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूरा सभागार ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल’ के जयकारों से गूंज उठा।
समाज के लिए किया गया कार्य ही दिलाता है वास्तविक पहचान
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराजश्री ने कहा कि जीवन में अर्जित की गई गाड़ी, मकान या कारखाना व्यक्ति के जाने के बाद उसकी पहचान नहीं बनते। लोग उसे इस बात के लिए याद करते हैं कि उसने समाज के लिए क्या किया और दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में छोटे और संकुचित विचारों के बजाय अच्छे विचार अपनाने चाहिए। जैसे हमारे विचार होंगे, वैसा ही हमारा संसार बनेगा। इसलिए विचारों की शुद्धता और अच्छे कर्मों को जीवन का आधार बनाना चाहिए।
भगवान से जोड़ें अपने संबंधों की डोर
गंगासागर धाम भवन निर्माण प्रकल्प के लिए आयोजित इस भागवत कथा में स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज ने जीवन में रिश्तों और आध्यात्मिकता के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर किसी न किसी संबंध की डोर से बंधा रहता है। लेकिन यदि भगवान के करीब जाना है तो अपने संबंधों की डोर ठाकुरजी से जोड़नी होगी। भगवान के साथ कोई भी रिश्ता स्थापित किया जा सकता है। जीवन में जहां भी कोई कमी महसूस हो, वहां ठाकुरजी को स्थान दे देना चाहिए। वे निश्चित रूप से उस संबंध को निभाएंगे।
वामन अवतार और रामचरितमानस के प्रसंगों की व्याख्या
कथा के दौरान महाराजश्री ने वामन अवतार, रामचरितमानस और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भी वर्णन किया। उन्होंने राम-जानकी विवाह प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
रामराज्य की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उस आदर्श व्यवस्था में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं के बीच भी परस्पर प्रेम और सद्भाव का वातावरण था। समाज में आपसी सहयोग, प्रेम और समरसता का भाव ही आदर्श जीवन की पहचान है।
उन्होंने कहा कि अमृत का पान करने वाले देव कहलाते हैं और विष को धारण करने वाले महादेव। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने त्याग, सहनशीलता और परोपकार का महत्व समझाया।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्तिमय हुआ वातावरण
भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग के वर्णन के साथ ही श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। पूरे सभागार में भजन और जयकारों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ जन्मोत्सव में भाग लिया।
इस अवसर पर हरि नारायण, सीताराम व्यास (हैदराबाद), बृजमोहन बेरीवाल, विधायक विजय ओझा, प्रदीप मुसद्दी, दीपक मुसद्दी, प्रदीप गाड़ोदिया, सीताराम शर्मा (गुरुजी), संजीव शर्मा, प्रदीप सुंतवाल, बंशीधर सुंतवाल, सीताराम तिवाड़ी, निखिल मुसद्दी, शैलेश मुसद्दी और राजेंद्र बाहेती अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अभिलाष तिवाड़ी, पंकज शर्मा, सुभाष शर्मा, रोहित दाधीच, पिंकी शर्मा, श्रीगोपाल व्यास, अनुरोध शर्मा, प्रदीप शर्मा, सुनील दाधीच, संतोष व्यास, रेणु मिश्रा, अनुराग शर्मा, सुरेश ईनाणिया और श्याम सुंदर शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई।































