झारखंड में 66 मेगावाट का पावर प्लांट लगाने के नाम पर बैंकों से लिया था कर्ज, दूसरी कंपनियों और निजी कामों में रकम इस्तेमाल करने का आरोप; लेकटाउन के अवनी ऑक्सफोर्ड परिसर में भी पहुंची जांच टीम
कोलकाता : करीब 290 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल में सात ठिकानों पर छापेमारी की। शुक्रवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान ईडी की अलग-अलग टीमें मामले से जुड़े संदिग्धों के आवास और अन्य परिसरों में पहुंचीं। इनमें कोलकाता के लेकटाउन स्थित अवनी ऑक्सफोर्ड आवासीय परिसर भी शामिल है।
जांच एजेंसी को संदेह है कि झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित करने के नाम पर बैंकों से लिया गया करीब 290 करोड़ रुपये का कर्ज निर्धारित परियोजना में खर्च करने के बजाय दूसरी कंपनियों और निजी कार्यों में इस्तेमाल किया गया।
66 मेगावाट के पावर प्लांट के नाम पर लिया गया था कर्ज
ईडी के अनुसार, कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने झारखंड में 66 मेगावाट क्षमता का पावर प्लांट स्थापित करने के लिए विभिन्न बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया था। इस परियोजना के लिए करीब 290 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया गया था।
हालांकि, आरोप है कि बैंक से मिली रकम का इस्तेमाल बिजली संयंत्र स्थापित करने के निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया गया। इसके बजाय कथित तौर पर इस राशि को समूह की दूसरी कंपनियों और निजी कार्यों में स्थानांतरित कर दिया गया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कर्ज की रकम किन-किन खातों में भेजी गई और इसका वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ।
लेकटाउन के अवनी ऑक्सफोर्ड परिसर में भी छापेमारी
शुक्रवार सुबह से शुरू हुई ईडी की कार्रवाई के तहत कोलकाता के लेकटाउन स्थित अवनी ऑक्सफोर्ड आवासीय परिसर में भी तलाशी अभियान चलाया गया। यहां मामले से जुड़े एक व्यक्ति के आवास पर जांच अधिकारियों ने दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारियों की पड़ताल की।
ईडी की टीमों ने अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान चलाया। पूरी कार्रवाई के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस के साथ समन्वय बनाया गया।
वित्तीय लेन-देन की जांच में जुटी ED
फिलहाल ईडी का मुख्य ध्यान बैंक से लिए गए कर्ज की पूरी रकम का हिसाब जुटाने पर है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कथित तौर पर रकम किन कंपनियों के माध्यम से स्थानांतरित की गई और इस पूरे लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही।
सात ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई के बाद मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल जांच जारी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।





























