कोलकाता : राष्ट्रीय संत और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (अयोध्या) के महासचिव स्वामी श्री गोविंददेव गिरिजी महाराज ने कहा कि अगर आपकी भक्ति प्रह्लाद जैसी होगी तो परमात्मा हर वक्त आपके सहायक होंगे, इसलिए ईश्वर को पाना हो तो प्रह्लाद की तरह बनिए। गंगासागर धाम भवन निर्माण प्रकल्प हेतु श्री दाधीच परिषद (कोलकाता) के बैनर तले वीआईपी रोड (गोलाघाटा) स्थित डीवीनीटी पैवेलियन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार (28 अक्तूबर) को ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद भक्ति और नरसिंह अवतार पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था, जिसके सुनने मात्र से भक्त प्रह्लाद के कई कष्ट दूर हो गए थे।
उन्होंने कहा कि भक्ति किसी क्रिया का नाम नहीं है, भक्ति तो अनुराग का पर्याय है। स्वामीजी ने कहा कि संसार जड़ है और साधना चेतन। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है। अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुवजी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था। ऐसी कई मिसालें हैं, जिससे सीख लेने की जरूरत है।
व्यासपीठ से स्वामीजी ने कहा कि संत-गुरु की कृपा से मनुष्य मोह और भ्रम से मुक्त होकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का अनुभव कर सकता है। जीवन में भजन-कीर्तन को अपनाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपने आप में लीन होना ही परम भक्ति है। महाराजश्री ने कहा कि भगवान एक ही है, लेकिन रुप अनेक है। सब को एक ही रुप में देख पाना यह केवल ध्यान से संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान का होना ही मानव जीवन का सदुपयोग है।
तीसरे दिन की कथा में विशेष रुप से उपस्थित थे महेश शर्मा, विश्वनाथ सेक्सरिया, ओमप्रकाश सक्सेना, हरि प्रसाद पलोड, अरुण लड्ढा, सुरेंद्र शर्मा, प्रदीप मुसद्दी, निखिल मुसद्दी, अशोक माहेश्वरी, चांद रतन चांडक, शंभू प्रसाद अग्रवाल, शोभा मोहता, आशा साबू , धरणीधर दाधीच व मंजू अग्रवाल। आयोजन को सफल बनाने में अनुराग शर्मा, पंकज शर्मा, रामेश्वर लाल रतावा, प्रदीप शर्मा, सुनील दाधीच, मन्ना लाल शर्मा, पंडित राम प्रसाद जोशी, पंडित गिरधर शर्मा व हरीश तिवाड़ी सक्रिय भूमिका निभाई।
































