कोलकाता : पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को बताया कि भविष्य में स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) के माध्यम से नियुक्त होने वाले शिक्षकों को प्रत्यक्ष राजनीति में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी। वे पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा या लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, यह शर्त नई नियुक्तियों पर लागू होगी, जबकि पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों को इससे बाहर रखा जाएगा।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री का ऐलान
बुधवार को नवान्न में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार नई नियुक्तियों और पदों के सृजन पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछली कैबिनेट बैठक में लगभग 45 हजार पदों के सृजन को मंजूरी दी गई थी। बुधवार की बैठक में भी करीब 1,200 नए पदों को स्वीकृति दी गई। सरकार का दावा है कि पिछले कुछ मंत्रिमंडलीय फैसलों को मिलाकर करीब 60 हजार नौकरियों के रास्ते खोलने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
हालांकि, इन पदों पर भर्ती की समयसीमा, विभागवार ब्योरा और नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
नए शिक्षकों को प्रत्यक्ष राजनीति से रहना होगा दूर
कैबिनेट के बाद सबसे अधिक चर्चा शिक्षकों और राजनीति से जुड़े फैसले को लेकर हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में स्कूल सर्विस कमीशन के जरिए नियुक्त होने वाले शिक्षकों को प्रत्यक्ष राजनीति में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस प्रस्ताव के अनुसार, नई नियुक्ति पाने वाले शिक्षक पंचायत और नगर निकाय चुनावों से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनावों तक में उम्मीदवार नहीं बन सकेंगे। यानी सरकारी शिक्षक के रूप में नियुक्त होने के बाद सक्रिय राजनीतिक पद संभालने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की योजना है।
सरकार का तर्क है कि शिक्षकों को अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को राजनीति से अलग रखने की जरूरत है। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत कानूनी आधार और इसे लागू करने के लिए जरूरी सेवा नियमों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुराने शिक्षकों को मिलेगी छूट
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नियम पहले से नियुक्त शिक्षकों पर उसी तरह लागू नहीं होगा, जिस तरह भविष्य में भर्ती होने वाले शिक्षकों पर लागू किया जाएगा।
उनके अनुसार, जिन शिक्षकों की नियुक्ति पहले हो चुकी है और जो पंचायत या नगर निकायों में जनप्रतिनिधि अथवा राजनीतिक पदों पर कार्यरत हैं, उन्हें इस नई शर्त के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इसकी वजह बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी नियुक्ति के समय इस तरह की शर्त मौजूद नहीं थी।
इसलिए नई व्यवस्था मुख्य रूप से भविष्य में स्कूल सर्विस कमीशन के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों पर केंद्रित होगी। हालांकि, पुराने और नए कर्मचारियों के बीच नियमों के इस अंतर को किस तरह कानूनी रूप दिया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
शिक्षक भर्ती और राजनीतिक भागीदारी पर नई बहस
शिक्षकों के चुनाव लड़ने और प्रत्यक्ष राजनीति में भाग लेने पर प्रस्तावित रोक से शिक्षा जगत में चर्चा तेज होने की संभावना है। एक ओर सरकार इसे शिक्षकों की पेशेवर जिम्मेदारियों से जोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की शर्तों को सेवा नियमों और संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में भी देखा जाएगा।
5 नवंबर को घोषित होगी नई औद्योगिक नीति
कैबिनेट बैठक में राज्य की नई औद्योगिक नीति को भी मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, इस नीति की औपचारिक घोषणा 5 नवंबर को नवान्न सभागार में की जाएगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में बड़े उद्योगों और नए निवेश को आकर्षित करना है। इसके लिए प्रोत्साहन योजनाओं, सिंगल विंडो सिस्टम और जमीन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, इन उपायों का विस्तृत स्वरूप नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कुल मिलाकर, कैबिनेट के फैसलों में रोजगार सृजन, शिक्षक भर्ती से जुड़ी शर्तों और औद्योगिक निवेश पर जोर दिया गया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि शिक्षकों के राजनीतिक अधिकारों से जुड़ी प्रस्तावित व्यवस्था को सरकार किस कानूनी रूप में लागू करती है और नई औद्योगिक नीति में निवेश के लिए क्या प्रावधान किए जाते हैं।































