कोलकाता : बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का नाम बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया है। बंगाली भाषा में ‘अर्नब’ का संबंध समुद्र या महासागर से माना जाता है। लेकिन किसी चक्रवात का नाम रखने के पीछे सिर्फ उसका अर्थ नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय नियम और देशों की सहमति भी होती है। एक बार इस्तेमाल किए गए नाम को दोबारा क्यों नहीं चुना जाता।
अर्नब के नाम का मतलब?
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Arnab) इन दिनों चर्चा में है। इस नाम को बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया था। बंगाली भाषा में ‘अर्नब’ शब्द का संबंध समुद्र या महासागर से जोड़ा जाता है। हालांकि, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की आधिकारिक सूची में नाम के अर्थ की अलग से व्याख्या नहीं दी गई है। सूची में इसके प्रस्तावक देश और उच्चारण का उल्लेख है।
दिलचस्प बात यह है कि तूफान का नाम उस देश के नाम पर नहीं रखा जाता, जहां उसके पहुंचने की आशंका होती है। इसके बजाय, पहले से तैयार अंतरराष्ट्रीय सूची के अनुसार नाम चुना जाता है।
क्यों रखे जाते हैं चक्रवातों के नाम?
पहले चक्रवातों की पहचान उनकी भौगोलिक स्थिति, अक्षांश और देशांतर के आधार पर की जाती थी। लेकिन मौसम विज्ञान के विकास और एक ही समय में कई मौसमी प्रणालियों की निगरानी की जरूरत ने इस तरीके को मुश्किल बना दिया।
ऐसे में तूफानों को छोटे और आसानी से याद रखे जाने वाले नाम देने की व्यवस्था विकसित हुई। इसका उद्देश्य मौसम विभाग, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों के बीच सूचना का आदान-प्रदान आसान बनाना है।
नाम होने से किसी विशेष चक्रवात से संबंधित चेतावनियों, समाचारों और बचाव अभियानों को पहचानना सरल हो जाता है। इससे लोगों तक खतरे की जानकारी पहुंचाने और समय रहते तैयारी करने में भी मदद मिलती है।
कौन तय करता है चक्रवातों के नाम?
दुनिया भर में चक्रवातों के नाम रखने के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय व्यवस्थाएं हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र की एशिया एवं प्रशांत क्षेत्रीय आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) के तहत क्षेत्रीय पैनल इस व्यवस्था को संचालित करते हैं।
भारत, बांग्लादेश और अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी से जुड़े अन्य देशों के लिए WMO/ESCAP पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन्स नामों की सूची तैयार करता है। इस क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण की जिम्मेदारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) की है।
जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में कोई मौसमी प्रणाली निर्धारित तीव्रता तक पहुंचकर चक्रवाती तूफान बनती है, तब IMD निर्धारित सूची के अनुसार उसे नाम देता है।
13 देशों के नामों से तैयार होती है सूची
उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नामकरण के लिए 13 देशों ने अपने-अपने नाम प्रस्तावित किए हैं। इनमें भारत और बांग्लादेश के अलावा ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं।
वर्ष 2020 में लागू की गई नई सूची में प्रत्येक देश ने 13 नाम दिए थे। इस तरह कुल 169 नामों की सूची तैयार हुई। इन नामों का इस्तेमाल तय क्रम में किया जाता है। सूची में भारत की ओर से प्रस्तावित नामों में ‘गति’, ‘तेज’, ‘मुरासु’ और ‘आग’ शामिल हैं, जबकि बांग्लादेश ने ‘निसर्ग’, ‘बिपरजॉय’, ‘अर्नब’ और ‘उपकुल’ जैसे नाम दिए हैं।
इस व्यवस्था में नामों का चयन मनमाने ढंग से नहीं किया जाता। सदस्य देश अपने प्रस्ताव भेजते हैं और क्षेत्रीय स्तर पर तय प्रक्रिया के तहत नामों को अंतिम सूची में शामिल किया जाता है।































