प्रधानमंत्री मोदी बोले- ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं, ‘सबके साथ और सबके विकास’ के रास्ते पर आगे बढ़ेगा समूह
नई दिल्ली : दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक दक्षिण यानी ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण में और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स किसी देश के खिलाफ बनाया गया समूह नहीं है, बल्कि आपसी सहयोग और सहमति के आधार पर आगे बढ़ने का मंच है। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार की भी जोरदार वकालत की।
शनिवार दोपहर ब्रिक्स सम्मेलन का घोषणापत्र जारी किया गया। सभी सदस्य देशों की सहमति से जारी इस घोषणापत्र में किसी देश का नाम लिए बिना एकतरफा टैरिफ लगाने की नीतियों की आलोचना की गई। पिछले एक वर्ष के दौरान अमेरिका की ओर से कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ब्रिक्स के घोषणापत्र में एकतरफा शुल्क का विरोध सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति की ओर संकेत माना जा रहा है।
आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध
ब्रिक्स देशों ने अलग-अलग देशों पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध किया। घोषणापत्र में चिंता जताई गई कि इस तरह के प्रतिबंध संबंधित देशों के आर्थिक विकास के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं।
ब्रिक्स ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान कूटनीति और बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। गाजा में तत्काल युद्धविराम की जरूरत पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा, समूह ने संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी का समर्थन किया।
UN सुरक्षा परिषद में सुधार पर मोदी का जोर
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी को लेकर प्रयास करता रहा है। दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार की मांग उठाई।
मोदी ने कहा, “सुरक्षा परिषद में सुधार में और देरी नहीं की जा सकती।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने उल्लेखनीय प्रगति की है और वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सदस्य देशों से आपसी मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के नजरिए का सम्मान करते हुए सहमति के आधार पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं हैं; बल्कि हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं।”
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ के देशों को अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण में अधिक प्रभावी भूमिका दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था की तुलना एक पिरामिड से करते हुए कहा कि इसके शीर्ष पर मौजूद देश महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं, जबकि निचले स्तर पर मौजूद देश उन फैसलों से प्रभावित होते हैं।
मोदी ने कहा कि दक्षिणी गोलार्ध के देशों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अब भी सीमित है। उन्होंने इन देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई।
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ की भूमिका का मुद्दा उठाया है। इससे पहले ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विभिन्न वैश्विक गठबंधनों में विकासशील देशों को उचित प्रतिनिधित्व देने की वकालत की थी। दिल्ली में एक बार फिर उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से वैश्विक नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
































