तृणमूल से NCPI में जाने वाले सांसदों को जवाब दाखिल करने के लिए मिला अतिरिक्त समय
नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने वाले 20 ‘बागी’ सांसदों को बड़ी राहत मिली है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इन सांसदों की ओर से समय बढ़ाने की मांग को स्वीकार कर लिया है। अब उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए 21 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।
लोकसभा सचिवालय ने इससे पहले इन सांसदों को नोटिस जारी कर उनसे उनकी स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा था। उन्हें जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। हालांकि, सांसदों ने जवाब तैयार करने के लिए अधिक समय की मांग की थी। उनकी अपील स्वीकार करते हुए लोकसभा सचिवालय ने समयसीमा तीन सप्ताह बढ़ा दी है।
26 अगस्त को जारी हुआ था नोटिस
दरअसल, लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों को नोटिस जारी किया था। निर्धारित समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो गई थी। इसके बाद सांसदों की ओर से लोकसभा स्पीकर के सचिवालय से अतिरिक्त समय मांगा गया।
सुदीप बनर्जी और काकोली घोष दस्तीदार समेत कुछ सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए 22 सितंबर तक का समय मांगा था। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने उन्हें अतिरिक्त समय देने का फैसला किया।
सभी सांसदों को मिला तीन सप्ताह का समय
मथुरापुर से सांसद बापी हलदर ने शुक्रवार को बताया कि सांसदों ने 21 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था, जिसे लोकसभा सचिवालय ने स्वीकार कर लिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सभी सांसदों ने समान अवधि की मांग नहीं की थी। कुछ सांसदों ने 14 दिनों के भीतर जवाब देने की बात कही थी। इसके बावजूद सचिवालय ने सभी संबंधित सांसदों को तीन सप्ताह का समय दिया है।
रिकॉर्ड में अब भी तृणमूल के सांसद
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में ये सभी सांसद अब भी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य के तौर पर दर्ज हैं। हालांकि, राजनीतिक गतिविधियों में उनके NCPI के साथ जुड़ने के संकेत मिलते रहे हैं।
इन सांसदों के BJP नेतृत्व वाले NDA की बैठकों में शामिल होने की भी बात सामने आई है। इसके अलावा, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर उनके 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके बावजूद लोकसभा के भीतर उनकी सदस्यता तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के रूप में दर्ज है।
इसी आधार पर तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर के समक्ष इन 20 सांसदों के खिलाफ याचिका दायर कर उनकी संसदीय सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा
लोकसभा स्पीकर की ओर से इस मामले में फैसला नहीं आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 20 सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले पर निर्णय लेने में अनावश्यक देरी हो रही है। इसके साथ ही लोकसभा स्पीकर और महासचिव के खिलाफ भी रिट याचिका दायर की गई है।
सितंबर के तीसरे सप्ताह में होगी अगली सुनवाई
इस मामले पर 25 अगस्त को चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संबंधित 20 सांसदों का पक्ष भी जानना चाहा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर के तीसरे सप्ताह में होने की उम्मीद है। ऐसे में लोकसभा स्पीकर की ओर से सांसदों को दी गई 21 दिन की मोहलत इस पूरे राजनीतिक और कानूनी विवाद में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





























