मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक हफ्ते के अंदर 60 नवजात बच्चों की मौत हो गई है, जिसमें से अकेले एक दिन में 10 बच्चों ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य भवन (स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय) ने कॉलेज प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अगस्त के दूसरे हफ्ते में एक ही दिन में 10 नवजातों की मौत हुई। वहीं तीसरे हफ्ते तक यह आंकड़ा बढ़कर 60 पर पहुंच गया।
44 बच्चे बाहर से रेफर किए गए थे
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि मरने वाले 60 बच्चों में से 44 बच्चों का जन्म मालदा मेडिकल कॉलेज में नहीं हुआ था। ये बच्चे जिले के अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम में पैदा हुए थे और गंभीर हालत में उन्हें मालदा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।
बाकी 16 बच्चों की मौत मालदा मेडिकल कॉलेज में जन्म के बाद हुई है। जिस दिन 10 बच्चों की मौत हुई, उसमें से 8 बच्चे बाहर से रेफर होकर आए थे और 2 बच्चे इसी अस्पताल में जन्मे थे।
मौत की वजह क्या बताई जा रही है?
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कुछ बच्चों को सांस लेने में दिक्कत (Respiratory Distress), कुछ को पीलिया (Jaundice) और कुछ को दिल से जुड़ी बीमारियां थीं। हालांकि एक हफ्ते में 60 मौतों के असली कारणों की जांच की जा रही है।
मालदा मेडिकल कॉलेज के सुपरिटेंडेंट प्रोसेनजीत बार ने कहा, “10 बच्चों में से सिर्फ दो का जन्म हमारे यहां हुआ था। बाकी को बाहर से गंभीर हालत में रेफर किया गया था। इस बारे में स्वास्थ्य भवन ने रिपोर्ट मांगी है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट भेज दी गई है। पूरी रिपोर्ट जल्द भेज दी जाएगी।”
स्वास्थ्य विभाग का एक्शन
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। खासकर प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम में डिलीवरी के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने मालदा जिले के 16 प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पतालों में छापेमारी शुरू कर दी है। मामले को लेकर मालदा मेडिकल कॉलेज, जिला स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस के बीच विस्तृत चर्चा हुई है। गुरुवार को जिला मजिस्ट्रेट (DM) के कार्यालय में इस मुद्दे पर बड़ी बैठक बुलाई गई है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “एक जिले में एक हफ्ते में शिशु मृत्यु दर ने पूरे राज्य के शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों पर असर डाला है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंताजनक माना जा रहा है। जांच जारी है।”
वहीं इस पूरे मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।





























