कोलकाता: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाज़त मांगने वाली एक पिटीशन खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का ज़रूरी या ‘ज़रूरी धार्मिक रिवाज’ साबित नहीं हुआ है। इसलिए, कोर्ट ने स्कूल अधिकारियों के इंस्टीट्यूशनल नियम और अनुशासन बनाए रखने के फैसले को सही ठहराया।
प्रयागराज के एक स्कूल की 11वीं क्लास की स्टूडेंट ने कोर्ट में अर्जी देकर अपनी स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या स्कार्फ पहनने की इजाज़त मांगी थी (hijab essential religious practice)। उसने दावा किया कि वह बचपन से इसे पहन रही है और यह संविधान के आर्टिकल 25 के मुताबिक उसके फंडामेंटल धार्मिक अधिकार का हिस्सा है। लेकिन जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस दावे को मानने से इनकार कर दिया । कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ दावा करने से धार्मिक आज़ादी के तहत सुरक्षा नहीं मिलती। पिटीशनर कोर्ट के सामने कोई धार्मिक या कानूनी जानकारी पेश नहीं कर सकी कि अगर उसने हिजाब नहीं पहना तो उसके धर्म या विश्वास पर असर पड़ेगा। केस की सुनवाई के दौरान, पिटीशनर ने दलील दी कि स्कूल अथॉरिटीज़ ने क्लास 6 से 10 तक उसके हिजाब पहनने पर कोई एतराज़ नहीं किया। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर स्कूल अथॉरिटीज़ ने पहले लापरवाही या तहज़ीब की वजह से उसे नहीं रोका, तो कोई परमानेंट कानूनी हक नहीं बनता। अगर स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन बाद में अपने ड्रेस कोड या यूनिफॉर्म पॉलिसी को सख्ती से लागू करना चाहता है, तो इसमें कोई कानूनी रुकावट नहीं आ सकती। कोर्ट के मुताबिक, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में यूनिफॉर्म ड्रेस कोड लागू करने का मुख्य मकसद डिसिप्लिन और बराबरी बनाए रखना है। वहां पर्सनल पसंद के आधार पर छूट देना मुमकिन नहीं है।
डिवीजन बेंच ने यह भी कहा कि कई हाई कोर्ट्स पहले भी यह मान चुके हैं कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का ज़रूरी हिस्सा नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस बारे में कर्नाटक हाई कोर्ट को अपने पिछले फैसले की भी याद दिलाई। हालांकि उस समय सुप्रीम कोर्ट का फैसला बंटा हुआ था, लेकिन कर्नाटक हाई कोर्ट का आदेश लागू रहा और इलाहाबाद हाई कोर्ट को भी उस फैसले से अलग राय रखने का कोई कारण नहीं मिला। आखिरकार, कोर्ट ने स्टूडेंट की पिटीशन पूरी तरह से खारिज कर दी और स्कूल अथॉरिटीज़ को अपने यूनिफॉर्म रूल्स लागू करने का पूरा हक दे दिया।





























