बोलीं- ‘बच्चे की सुरक्षा के लिए फुटपाथ खाली रखना जरूरी’
कोलकाता: फ्री स्कूल स्ट्रीट के फुटपाथ पर एक महिला के बच्चे के लिए दूध गर्म करने को लेकर सामने आए वीडियो ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर संवेदनहीनता के आरोप लगाए। अब इस पूरे मामले पर कोलकाता की पुर मंत्री अग्निमित्रा पाल ने सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई का मकसद किसी गरीब परिवार को परेशान करना नहीं, बल्कि फुटपाथ को आम लोगों के आवागमन के लिए सुरक्षित रखना था।
दूध गर्म करने के वीडियो पर अग्निमित्रा पाल की सफाई
अग्निमित्रा पाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि पिछले दिन से फ्री स्कूल स्ट्रीट के फुटपाथ पर दूध गर्म करने को लेकर काफी राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि किसी ने परिवार की मदद के लिए एक कटोरी दूध तक नहीं पहुंचाया, बल्कि पूरे मामले को राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
उन्होंने कहा कि फुटपाथ पर एक छह महीने का बच्चा मौजूद था और उसके आसपास तत्काल कोई अभिभावक नहीं था। उनके मुताबिक, पास में ही केरोसिन स्टोव पर दूध गर्म किया जा रहा था। अग्निमित्रा पाल ने सवाल उठाया कि यदि वहां कोई दुर्घटना होती तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
‘क्या सच में बच्चे का दूध फेंका गया?’
वायरल वीडियो के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या नगर प्रशासन की कार्रवाई के दौरान बच्चे के लिए गर्म किया जा रहा दूध फेंक दिया गया था। अग्निमित्रा पाल ने अपने बयान में इस आरोप का खंडन करते हुए पूरा मामला सुरक्षा और फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त रखने से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि फ्री स्कूल स्ट्रीट ऐसी सड़क है, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में फुटपाथ पर छह महीने के बच्चे का अकेले मौजूद होना और पास में स्टोव जलना दुर्घटना का कारण बन सकता था।
‘फुटपाथ किसी के लिए भी कब्जे की जगह नहीं’
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि फुटपाथ न तो अमीरों का है और न ही गरीबों का। इसका इस्तेमाल लोगों के पैदल चलने के लिए होना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस रुख का भी हवाला दिया, जिसमें फुटपाथ को पैदल यात्रियों के आवागमन के लिए मुक्त रखने की बात कही गई है।
पुर मंत्री ने यह भी दावा किया कि झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास को लेकर सरकार की योजना है। उन्होंने कहा कि संबंधित परिवार को पहले भी अपने घर लौटने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक, महिला ने कैमरे के सामने खुद बताया था कि वह धापाड़ा इलाके में रहती हैं।
कुणाल घोष भी महिला से मिलने पहुंचे
इस विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष संबंधित महिला से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी ली और फुटपाथ पर रहने वाले लोगों के पुनर्वास की जरूरत पर जोर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक तरफ विपक्ष इसे सरकार की संवेदनहीनता से जोड़ रहा है, वहीं अग्निमित्रा पाल का कहना है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त और सुरक्षित बनाने की कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी।
साफ-सुथरे शहर और पुनर्वास के बीच संतुलन की चुनौती
अग्निमित्रा पाल ने कहा कि सरकार ने चुनाव के दौरान जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए वह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोग साफ-सुथरा और व्यवस्थित शहर चाहते हैं।
हालांकि, फ्री स्कूल स्ट्रीट का यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि शहरी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ गरीब और फुटपाथ पर रहने वाले परिवारों के पुनर्वास को किस तरह संतुलित किया जाए। अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित परिवार की स्थिति पर भी नजर रहेगी।






























