जलवायु शिक्षा के लिए 7 वैश्विक रोडमैप प्रकाशित
कोलकाता, 22 अगस्त 2026: जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच भारत में दुनिया की पहली ‘क्लाइमेट कम्युनिकेशन एंड एजुकेशन’ (Climate Communication and Education) पुस्तक जारी की गई है। इसके साथ ही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 7 रोडमैप भी प्रकाशित किए गए हैं। यह पहल जलवायु परिवर्तन को लेकर लोगों में वैज्ञानिक समझ, जागरूकता और व्यवहारिक बदलाव को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
Global Climate Care, Kolkata, India की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इस पुस्तक का नाम “Strategic Roadmap for Climate Communication and Education Worldwide” है। पुस्तक में जलवायु संचार और शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए एक व्यापक मॉडल प्रस्तुत किया गया है।
जलवायु शिक्षा के लिए नया मॉडल
प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस मॉडल को विकसित करने वाले लेखक सौभिक चोंगदर ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर जमीनी स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक संचार और शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया है।
मॉडल में विकासशील और विकसित दोनों देशों के लिए अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखने की बात कही गई है। इसमें गरीबी, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, बढ़ती आबादी, बदलती जलवायु और असामान्य जलवायु घटनाओं जैसी चुनौतियों को जलवायु शिक्षा के साथ जोड़कर देखने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में यह भी बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर कृषि, उत्पादन, अर्थव्यवस्था, रोजगार और मानव जीवन पर भी पड़ रहा है। ऐसे में जलवायु संबंधी जानकारी को आम लोगों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाना जरूरी है।
ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर जलवायु जागरूकता पर जोर
प्रेस रिलीज में कहा गया है कि प्रस्तावित मॉडल को ग्रामीण क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। इसके जरिए स्थानीय समुदायों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, पानी के स्रोतों के संरक्षण, बढ़ती गर्मी और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद करने का लक्ष्य रखा गया है।
भारत जैसे बड़े और विविध देश में स्थानीय स्तर पर जलवायु शिक्षा को मजबूत करने को इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। मॉडल के जरिए ग्रामीण और शहरी समुदायों के बीच जलवायु संबंधी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।
16,000 से अधिक लोगों की भागीदारी का दावा
प्रेस रिलीज के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से जुड़े इस प्रयास में 16,000 से अधिक लोगों की भागीदारी रही है। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत लोग विकासशील देशों से जुड़े बताए गए हैं।
लेखक सैविक चौधरी के अनुसार, जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं रह गया है। इसके प्रभावों को देखते हुए आम लोगों के बीच जलवायु विज्ञान, उसके प्रभावों और संभावित समाधानों की बुनियादी समझ विकसित करना समय की जरूरत है।
पुस्तक में प्रकाशित 7 रोडमैप का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुसार जलवायु शिक्षा एवं संचार को आगे बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक दिशा प्रदान करना है।






























