बजट को समझने और उसका विश्लेषण करने, सरकारी अकाउंटिंग, वित्तीय जिम्मेदारी और टिकाऊ वित्तीय प्रबंधन के बारे में दी गईं जानकारियां।
कोलकाता : देश के निर्माण में अहम योगदान देने और पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट को मजबूत करने की कोशिशों के तहत, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने 18 अगस्त को कोलकाता में अपने ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्यों के लिए “स्ट्रेंथनिंग गवर्नेंस इन पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट: एलेजिस्लेटिव प्रस्पेक्टिव” विषय पर वर्कशॉप का आयोजन किया।
पब्लिक फाइनेंस के मुख्य पहलुओं पर चर्चा
यह वर्कशॉप विधायकों के लिए पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट, फिस्कल गवर्नेंस (वित्तीय शासन) और निगरानी के बारे में अपनी समझ को गहरा करने का एक अहम मंच साबित हुआ। इसमें पब्लिक फाइनेंस के मुख्य पहलुओं पर केंद्रित चर्चाएँ हुईं। जिनमें राज्य के बजट को समझना और उसका विश्लेषण करना, सरकारी अकाउंटिंग, वित्तीय जिम्मेदारी और टिकाऊ वित्तीय प्रबंधन शामिल था।
कौन-कौन हुआ शामिल
उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल विधानसभा के माननीय अध्यक्ष रथींद्र बोस सम्मानीय अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनके साथ आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्न कुमार डी, आईसीएआई के वाइस-प्रेसिडेंट सीए मंगेश किनारे, पब्लिक एंड गवर्नमेंट फाइनेंशियल मैनेजमेंट कमेटी (पीजीएफएमसी) के चेयरमैन सीए हंस राज चुघ, पीजीएफएमसी के वाइस चेयरमैन सीए अर्पित काबरा, आईसीएआई के सीसीएम सीए रवि कुमार पटवा, आईसीएआई के सीसीएम सीए संजीव सांघी और आईसीएआई की ईस्टर्न इंडिया रीजनल काउंसिल के चेयरमैन सीए मयूर अग्रवाल भी मौजूद थे।
वित्तीय जवाबदेही
इस मौके पर आईसीएआई के अध्यक्ष सीए प्रसन्न कुमार डी ने कहा, आईसीएआई पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट को मजबूत करने, वित्तीय जवाबदेही बढ़ाने और संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनता के पैसे का हर रुपया ज्यादा पारदर्शिता, दक्षता और जन-मूल्य प्रदान कर सके।
आईसीएआई के वाइस-प्रेसिडेंट सीए मंगेश किनारे ने कहा, आईसीएआई अपनी पेशेवर विशेषज्ञता का इस्तेमाल करना और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना जारी रखेगा ताकि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट को और भी मजबूत किया जा सके इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके साथ हीं सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल व नागरिकों के लिए बेहतर नतीजों के लिए सही जानकारी पर आधारित निर्णय लेने में मदद मिल सके।
सरकारी खर्च की प्रभावी निगरानी
पश्चिम बंगाल विधानसभा के लगभग 110 चुने हुए सदस्यों ने इस वर्कशॉप में हिस्सा लिया। इन सत्रों को समझदारी भरे वित्तीय प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, बजट प्रक्रियाओं और पब्लिक फाइनेंस में जवाबदेही व पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निगरानी की अहम भूमिका के बारे में उनकी समझ को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया था। इस वर्कशॉप में इस बात पर सार्थक बातचीत और विचार-विमर्श का मौका भी मिला कि, कैसे विधायकों की बेहतर वित्तीय समझ, सोच-समझकर फैसले लेने, सरकारी खर्च की प्रभावी निगरानी और नागरिकों के लिए बेहतर गवर्नेंस के नतीजों में मदद कर सकती है।वर्कशॉप का समापन पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने में वित्तीय समझदारी और मजबूत विधायी निगरानी के महत्व पर जोर देने के साथ हुआ।





























