कोलकाता, भारत — किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे के मुंह से पहला शब्द सुनना बेहद खास और कीमती पल होता है। लेकिन 15 महीने की इस छोटी बच्ची के परिवार के लिए शुरुआती महीने एक दिल तोड़ने वाली सच्चाई लेकर आए—उनकी बच्ची जन्म से ही गंभीर रूप से सुनने में असमर्थ (जन्मजात बहरापन) थी और पूरी तरह खामोशी की दुनिया में जी रही थी।
अपनी बेटी को सुनने, बोलने और बाहर की दुनिया से जुड़ने का मौका देने के पक्के इरादे के साथ, उसके माता-पिता कुवैत से 3,000 मील से भी ज्यादा का सफर तय करके कोलकाता पहुंचे।
उनकी उम्मीद और विश्वास का यह सफर चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी के साथ पूरा हुआ। कोलकाता के अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स के ईएनटी-हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के मुख्य सर्जन डॉ. शांतनु पंजा के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने 15 महीने की इस बच्ची के दोनों कानों में ‘पीडियाट्रिक बायलैटरल नेक्सा स्मार्ट इम्प्लांट’ (NEXA Smart Implant) सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
सर्जरी के बाद सही देखभाल और रिकवरी के बाद, बच्ची अब पूरी तरह ठीक हो चुकी है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
डॉ. पंजा ने कहा, “इतनी छोटी उम्र के बच्चे की सर्जरी करने के लिए सिर्फ तकनीकी बारीकियों की ही नहीं, बल्कि एक मासूम जान के प्रति बेहद सतर्कता और देखभाल की जरूरत होती है। मायशा के माता-पिता के लिए अपनी 15 महीने की बच्ची को हमारी टीम के हाथों में सौंपना एक बहुत बड़े विश्वास का कदम था। हमें बेहद खुशी है कि वह बिना किसी परेशानी के पूरी तरह ठीक हो चुकी है और बहुत अच्छी स्थिति में है। अब पूरी टीम और उसका परिवार ‘स्विच-ऑन’ सेशन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जब पहली बार उसके इम्प्लांट्स को चालू (एक्टिवेट) किया जाएगा।”
इस ऐतिहासिक सर्जरी में हाल ही में लॉन्च किए गए ‘कॉकलियर न्यूक्लियस नेक्सा सिस्टम’ का इस्तेमाल किया गया—जो दुनिया का पहला “स्मार्ट” कॉकलियर इम्प्लांट है। इसमें इंटरनल मेमोरी और अपग्रेड होने वाला फर्मवेयर है, जो मायशा के बड़े होने के साथ-साथ खुद को उसके अनुकूल ढाल लेगा। बच्ची के कान के अंदर हर नाजुक कदम पर सही गाइडेंस के लिए, सर्जिकल टीम ने इस इलाके में पहली बार ‘स्मार्टनैव’ (SmartNAV) तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसने इलेक्ट्रोड डालते समय डॉक्टरों को स्क्रीन पर बिल्कुल सटीक स्थिति दिखाई।
15 महीने की बच्ची की इस लंबी सर्जरी के दौरान उसे सुरक्षित और स्थिर बनाए रखने के लिए बेहतरीन टीमवर्क और लगातार निगरानी की जरूरत थी। डॉ. कौस्तुभ चौधरी के नेतृत्व में पीडियाट्रिक टीम और डॉ. विश्वजीत नंदी की अगुआई वाली एनेस्थीसिया टीम ने मिलकर काम किया, ताकि पूरी सर्जरी और रिकवरी के दौरान मायशा पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक स्थिति में रहे।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, अब नन्हीं मायशा अपनी जिंदगी के अगले सबसे बड़े मोड़ के लिए तैयार हो रही है—वो आने वाला ‘स्विच-ऑन’ का दिन, जब उसका कान पहली बार आवाज़ों को सुनेगा। इसके साथ ही खामोशी का दौर खत्म होगा और उसकी दुनिया माता-पिता की आवाज, संगीत और हंसी से गूंज उठेगी।
अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स, कोलकाता के बारे में
कोलकाता का अपोलो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स एक प्रमुख टर्शियरी केयर अस्पताल है, जो देश-विदेश के मरीजों को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, आधुनिक सर्जिकल नवाचार (इनोवेशन) और देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।





























