सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा से पूछा
नई दिल्ली : तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने फेसबुक पर एक भड़काऊ पोस्ट के मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेश होने की इजाज़त मांगी थी।
क्या थी सांसद की दलील
जब सांसद ने यह दलील दी कि अगर वह वहां खुद गईं तो भीड़ उन पर हमला कर सकती है और उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं, तो जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा, “आप संसद सदस्य हैं? राजनीति में आने के बाद भी आप अंडों से डरती हैं? जबकि हमारे आज़ादी के दीवानों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं? ऐसी अर्जियां इस कोर्ट के सामने बिल्कुल नहीं आनी चाहिएं।”
कोर्ट ने पूछा वर्चुअली क्यों
महुआ मोइत्रा की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उन्हें वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने की इजाज़त दी जानी चाहिए। SC ने पूछा, “वर्चुअली क्यों? क्या इसलिए कि आप सांसद हैं?” इस पर शंकरनारायणन ने कहा कि मोइत्रा को डर है कि अगर वह पुलिस के सामने खुद पेश हुईं तो भीड़ हमला कर सकती है। इससे पहले बंगाल में उन पर अंडे फेंके गए थे।
क्या है मामला
पिछले महीने, कलकत्ता HC ने FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए मोइत्रा को अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था।
हेट स्पीट का घटनाक्रम
जून में नादिया में मोइत्रा के खिलाफ हेट-स्पीच FIR दर्ज की गई। इसके बाद 1 जुलाई को नादिया में उन पर अंडे और पत्थर फेंके गए थे। 3 जुलाई को इस मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा और FIR रद्द करने के लिए उन्होंने कलकत्ता HC का रुख किया। 21 जुलाई को HC ने अंतरिम सुरक्षा दी, लेकिन जांच अधिकारी (IO) के सामने खुद पेश होने का निर्देश दिया। 6 अगस्त को सांसद ने वर्चुअल पेशी की अर्जी के साथ SC का रुख किया, जहां पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जज ने यह टिप्पणी की और मामले को खारिज कर दिया।





























