बंगाल में देखे गए अत्याचारों को किया याद
कोलकाता : राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने पिछले साल अप्रैल में राज्य का दौरा किया था । वह मालदा व मुर्शिदाबाद गई थीं। उस समय वहां हालात तनावपूर्ण थे। अब सत्ता में बदलाव के बाद, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर फिर यहां आईं हैं। कोलकाता में एक कार्यक्रम में उन्होंने एक साल पहले के भयावह हालात को याद किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के जो दृश्य उन्होंने तब देखे थे, उनके कारण वे आठ दिनों तक सो नहीं पाई थीं।
अप्रैल 2025 में, मुर्शिदाबाद के धूलियान और शमशेरगंज के बड़े इलाकों में वक्फ़ संशोधन अधिनियम के विरोध के कारण तनाव फैल गया। उस दौरान महिलाओं के खिलाफ़ कई तरह के अत्याचारों के आरोप भी सामने आए। हालात इतने खराब हो गए कि बहुत से लोग नदी पार करके मालदा में शरण लेने चले गए।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया। आयोग की अध्यक्ष विजया ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उस इलाके का दौरा किया। उन्होंने मुर्शिदाबाद के प्रभावित इलाकों और मालदा में राहत शिविरों का दौरा किया और डरी-सहमी महिलाओं से बातचीत की।
डरावने अनुभव को याद किया
एक साल बाद राज्य लौटीं विजया ने उस डरावने अनुभव को याद किया। गुरुवार को कोलकाता में राष्ट्रीय महिला आयोग की पहल पर ‘महिलाओं के नेतृत्व में उन्नत बंगाल’ नाम से एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी महिलाओं को बुलाया गया था। इसमें पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पंचायत मंत्री दिलीप घोष, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री मालती रावा रॉय और राज्य की गृह सचिव संघमित्रा घोष मौजूद थीं। उद्घाटन भाषण देते समय राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “मैं एक साल पहले मालदा और मुर्शिदाबाद गई थी। वहाँ की महिलाओं की पीड़ा को मैं आज भी नहीं भूल सकती। उस पीड़ा को देखने के बाद, मैं आठ दिनों तक सो नहीं पाई थी।” उस समय विजया के नेतृत्व में राष्ट्रीय महिला आयोग के एक प्रतिनिधिमंडल ने लगभग 350 घरों का दौरा किया। टीम के सदस्यों ने डरे-सहमे परिवारों से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय मिलेगा और हालात बेहतर होंगे।मुर्शिदाबाद की घटना के बारे में राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में आम लोगों के बीच फैली घबराहट का भी ज़िक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अशांति के दौरान पीड़ितों को पुलिस से मदद नहीं मिली; कुछ लोगों को पुलिस की मदद देर से मिली, जबकि कुछ ने पुलिस को कोई कार्रवाई न करते हुए देखा।महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पुलिस ने अशांति भड़काने वालों के प्रति नरम रवैया अपनाया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इन्हीं कारणों से उस समय पुलिस प्रशासन पर जनता का भरोसा कम हो गया था।





























