AIJACTO के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संबंध में RTE Act की धारा 23 में संशोधन की मांग उठाई।
नई दिल्ली : देशभर के शिक्षक संगठनों के संयुक्त मंच ऑल इंडिया जॉइंट एक्शन कमेटी ऑफ टीचर्स ऑर्गेनाइजेशंस (AIJACTO) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर इन-सर्विस शिक्षकों के लिए अनिवार्य TET से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उनका ध्यान आकर्षित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 23 में संशोधन करने की मांग की। संगठन का कहना है कि यह संशोधन भविष्य (Prospective) से लागू किया जाए, ताकि RTE अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त लाखों शिक्षकों के हित सुरक्षित रह सकें।
ज्ञापन में बताया गया है कि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि जिन कार्यरत शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष से अधिक का समय शेष है, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर टीईटी (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण करना होगा। समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है।
AIJACTO का कहना है कि पूर्व में जारी NCTE अधिसूचना के अनुसार, 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्राप्त थी। ऐसे में वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब यह शर्त लागू होने से लाखों शिक्षकों के सामने नौकरी और सेवा सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि सरकार संसद में RTE Act की धारा 23 में आवश्यक संशोधन लाकर पुराने शिक्षकों के हितों की रक्षा करे।
मुख्य बातें
AIJACTO के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से की मुलाकात।
TET से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।
RTE Act, 2009 की धारा 23 में संशोधन की मांग।
23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत देने की अपील।
लाखों कार्यरत शिक्षकों के हितों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया।






























