सीबीएसई का बड़ा फैसला
नई दिल्ली: Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बड़ा बदलाव लागू करने का फैसला किया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र से 6वीं से 10वीं कक्षा तक छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा। 9वीं और 10वीं कक्षा में यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाएगा।
सीबीएसई की ओर से जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रहेंगी, जबकि तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुनने का विकल्प भी मिलेगा। बोर्ड ने भाषा श्रेणियों को आर-1, आर-2 और आर-3 में बांटा है। आर-1 और आर-2 में भारतीय भाषाएं होंगी, जबकि आर-3 में विदेशी भाषा पढ़ाई जा सकेगी।
भारतीय भाषाओं की सूची में बंगाली, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और गुजराती जैसी भाषाएं शामिल हैं। अंग्रेजी को विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा गया है। यदि छात्र दो भारतीय भाषाएं पढ़ते हैं, तो वे अतिरिक्त विदेशी भाषा को चौथी भाषा के रूप में भी चुन सकते हैं।
सीबीएसई ने बताया कि अभी सभी भाषाओं की नई किताबें उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए जब तक 9वीं कक्षा के छात्रों को आर-3 विषय की पुस्तकें नहीं मिलतीं, तब तक वे 6वीं कक्षा के पाठ्यक्रम की किताबों से पढ़ाई कर सकेंगे। बोर्ड का कहना है कि माध्यमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के भाषा पाठ्यक्रम में 75-80 प्रतिशत समानता होती है, इसलिए छात्रों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
बोर्ड ने यह भी बताया कि 1 जुलाई से पहले 19 भाषाओं में 6वीं कक्षा की आर-3 किताबें स्कूलों तक पहुंचा दी जाएंगी। साथ ही शिक्षकों को स्थानीय संस्कृति से जुड़ी कहानियां, कविताएं और साहित्यिक सामग्री भी पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
सीबीएसई ने माना कि कई स्कूलों में भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षकों की कमी है। ऐसे में फिलहाल अन्य विषय पढ़ाने वाले लेकिन संबंधित भाषा जानने वाले शिक्षकों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा ऑनलाइन क्लास, स्कूलों के बीच शिक्षक साझा करने और सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं लेने का सुझाव भी दिया गया है।

























