कोलकाता : कोलकाता के चर्चित आर.जी. कर रेप-मर्डर केस में पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तीन IPS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इनमें पूर्व कोलकाता पुलिस कमिश्नर Vineet Goyal, तत्कालीन डीसी सेंट्रल Indira Mukherjee और तत्कालीन डीसी नॉर्थ Abhishek Gupta शामिल हैं।
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने शुक्रवार को कहा कि आर.जी. कर मामले में “मिसहैंडलिंग”, FIR दर्ज करने में लापरवाही और सबूतों के साथ कथित छेड़छाड़ को लेकर विभागीय जांच होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस समय की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की भूमिका की भी समीक्षा की जा सकती है।
विनीत गोयल पर क्यों उठे सवाल?
1994 बैच के IPS अधिकारी विनीत गोयल 2022 से सितंबर 2024 तक कोलकाता पुलिस कमिश्नर रहे। आर.जी. कर मामले के बाद जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन के दौरान उनके इस्तीफे की मांग उठी थी। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह लगा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पीड़िता की पहचान सार्वजनिक कर दी थी। बाद में इस मामले में उन्हें हाई कोर्ट में माफी भी मांगनी पड़ी। 14 अगस्त 2024 की “रात कब्जा” मुहिम के दौरान आर.जी. कर अस्पताल में हुई तोड़फोड़ के समय भी पुलिस की भूमिका सवालों में रही। आरोप लगा कि भारी संख्या में उपद्रवी अस्पताल परिसर में घुस गए लेकिन पुलिस सक्रिय नहीं हुई। उस समय विनीत गोयल ने माना था कि पुलिस हालात का अंदाजा नहीं लगा पाई। सिविक वॉलंटियर संजय रॉय ने अदालत में दावा किया था कि उसे फंसाया गया है और इसमें कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका है। इसके बाद राज्यपाल C. V. Ananda Bose ने भी मामले को गंभीरता से उठाया था।
इंदिरा मुखर्जी पर क्या आरोप लगे?
तत्कालीन डीसी सेंट्रल इंदिरा मुखर्जी पर आरोप लगा कि उन्होंने घटनास्थल को लेकर विरोधाभासी बयान दिए। घटना के बाद सामने आए वीडियो में सेमिनार हॉल के अंदर कई लोगों की मौजूदगी दिखाई दी थी। विपक्ष और आंदोलनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इससे सबूत नष्ट हो सकते थे। इंदिरा मुखर्जी ने शुरुआत में कहा था कि जिस हिस्से में शव मिला था, उसे पुलिस ने सुरक्षित रखा था और बाकी हिस्से में कुछ लोग मौजूद थे। लेकिन बाद में सामने आए वीडियो से उनके दावों पर सवाल उठे। विवाद तब और बढ़ गया जब वीडियो में अस्पताल के अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और कथित बाहरी लोगों की मौजूदगी के दावे किए गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले की गंभीरता के अनुरूप क्राइम सीन को सील नहीं किया।
अभिषेक गुप्ता की भूमिका पर विवाद
आर.जी. कर अस्पताल टाला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो तत्कालीन डीसी नॉर्थ अभिषेक गुप्ता के अधिकार क्षेत्र में था। उन पर आरोप लगा कि घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही हुई। CBI ने अदालत में कहा था कि पुलिस समय पर घटनास्थल नहीं पहुंची और क्राइम सीन को सुरक्षित रखने में विफल रही।मृतका के परिवार ने यह भी आरोप लगाया था कि पुलिस ने जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार कराया। सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि पीड़िता के परिवार को पैसे देने की कोशिश की गई थी। CBI ने अदालत में कहा था कि FIR दर्ज करने में देरी हुई, वीडियोग्राफी नहीं की गई और जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। इन्हीं आरोपों के बाद अभिषेक गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
अब क्या होगा?
तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक जांच शुरू की जाएगी। हालांकि राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेप-मर्डर केस की आपराधिक जांच अलग एजेंसियां कर रही हैं और यह कार्रवाई केवल पुलिस की कथित लापरवाही और प्रक्रिया संबंधी विफलताओं को लेकर है।

























