कोलकाता/जलपाईगुड़ी: आर्थिक तंगी, पिता का साया बचपन में उठ जाना, किराए के छोटे से घर में संघर्ष भरी जिंदगी—इन सब मुश्किलों को पीछे छोड़कर डुआर्स के मालबाजार के छात्र रूपायन चंद ने बड़ी सफलता हासिल की है। रूपायन ने हाल ही में घोषित JEE Main 2026 परीक्षा में 99.0019 पर्सेंटाइल हासिल कर सबको चौंका दिया है। उनकी सफलता अब पूरे इलाके में प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
डेढ़ साल की उम्र में पिता का निधन
रूपायन जब सिर्फ डेढ़ साल के थे, तभी उनके पिता निमाई चंद का निधन हो गया। इसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां शुक्ला चंद पर आ गई। पहले परिवार चालसा में रहता था, बाद में मालबाजार आकर किराए के घर में रहने लगा। रूपायन की मां सुबह दूसरे घरों में खाना बनाने का काम करती हैं और रात में मरीजों की देखभाल करती हैं। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी।
छोटे कमरे से बड़े सपनों तक का सफर
मालबाजार शहर के वार्ड नंबर 9 की एक संकरी गली में स्थित छोटे से किराए के कमरे में रूपायन का परिवार रहता है। कमरा इतना छोटा है कि मुश्किल से जगह बनती है। उसी कमरे के एक कोने में एक टेबल पर किताबें और स्कॉलरशिप के पैसों से खरीदा गया लैपटॉप रखा है। इन्हीं किताबों और लैपटॉप के सहारे रूपायन ने IIT तक पहुंचने का सपना देखा है।
पढ़ाई के साथ क्रिकेट में भी आगे
रूपायन माल आदर्श विद्या भवन के 12वीं कक्षा के छात्र हैं। घर में उन्हें प्यार से रिजु कहा जाता है। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाले रूपायन क्रिकेट मैदान में भी शानदार खिलाड़ी हैं। उनका कहना है कि खेल ने उन्हें जीवन की लड़ाई लड़ना सिखाया।
बिना कोचिंग पाई बड़ी सफलता
रूपायन ने बताया कि उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने किताबों, यूट्यूब और इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो के जरिए तैयारी की। उन्होंने कहा,
“मैंने बहुत पहले अपना लक्ष्य तय कर लिया था। पहली कोशिश में 98 प्रतिशत से अधिक स्कोर किया था, अब दूसरी कोशिश में 99 प्रतिशत से ज्यादा पर्सेंटाइल मिला है। अब मेरा पूरा ध्यान JEE Advanced पर है।”
मां ने कहा- सहयोग मिले तो और आगे जाएगा बेटा
रूपायन की मां शुक्ला चंद ने भावुक होकर कहा,
“मेरे बेटे-बेटी ने बहुत संघर्ष करके पढ़ाई की है। बेटा खेल के साथ पढ़ाई भी करता है। उसने अपनी मेहनत से यहां तक पहुंचा है। अगर सबका सहयोग मिले तो वह और आगे जाएगा।”
पूरे इलाके में खुशी की लहर
रूपायन की इस सफलता से परिवार, स्कूल और पूरे मालबाजार इलाके में खुशी का माहौल है। कठिन हालात में मेहनत और लगन से सफलता की यह कहानी आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

























