कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों ने समिति के लिए अलग-अलग नाम प्रस्तावित किए हैं, जिससे इस प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।रीताब्रत बनर्जी गुट ने PAC के लिए पांच नाम प्रस्तावित किए हैं। इनमें फिरहाद हकीम (बॉबी), बिप्लब मित्रा, गुलाम रब्बानी, कनयालाल अग्रवाल और समर मुखर्जी शामिल हैं। वहीं, कालीघाट गुट ने वरिष्ठ विधायक अशोक देब का नाम आगे बढ़ाया है।
विधानसभा की परंपरा के अनुसार, 20 सदस्यीय पब्लिक अकाउंट्स कमेटी में 14 सदस्य सत्तारूढ़ दल और 6 सदस्य विपक्ष से होते हैं। इन्हीं छह विपक्षी सदस्यों में से एक को समिति का अध्यक्ष बनाया जाता है।इस बीच, सत्तारूढ़ भाजपा ने PAC के लिए अपने 14 विधायकों को नामित किया है। इनमें अनूप कुमार साहा, अमलान भादुड़ी, बंकिम चंद्र घोष, हिरण्मय चटर्जी, कृष्णेंदु मुखर्जी, राजेश कुमार, रूपा गांगुली, सैकत पांजा, समरेंद्रनाथ घोष, शिखा चटर्जी, सोनम लामा, सौरभ सिकदर, सुब्रत ठाकुर और स्वप्न कुमार दास शामिल हैं।विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन स्पीकर रथींद्र बसु PAC अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा करेंगे।
PAC क्यों है महत्वपूर्ण?
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के खर्च, वित्तीय लेन-देन और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट की जांच करती है। इसलिए इस समिति के अध्यक्ष का पद राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुकुल रॉय के समय हुआ था विवाद
2021 के विधानसभा चुनाव के बाद मुकुल रॉय को PAC का अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, भाजपा के टिकट पर विधायक चुने जाने के बाद उनके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से इस फैसले पर विवाद खड़ा हो गया था। भाजपा ने उस समय अशोक लाहिड़ी के नाम का प्रस्ताव दिया था और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। बाद में 2022 में मुकुल रॉय ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए PAC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।






























