14 मौतों से बढ़ी चिंता; 202 मरीज सक्रिय
कोलकाता, 9 अक्टूबर 2026: पश्चिम बंगाल में डेंगू का खतरा अभी टला नहीं है। राज्य में इस साल अब तक डेंगू के 10,177 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 202 मरीज फिलहाल सक्रिय हैं। इनमें सात मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है। वहीं, इस साल डेंगू से अब तक 14 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। अक्टूबर महीने में ही दो लोगों की मौत दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। दुर्गा पूजा के दौरान संक्रमण की स्थिति को देखते हुए निगरानी और जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
साल्टलेक स्थित स्वास्थ्य भवन में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने डेंगू की स्थिति से जुड़े आंकड़े पेश किए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले साल यानी 2025 में राज्य में डेंगू के 12,652 मामले दर्ज किए गए थे। इस साल अब तक संक्रमितों की संख्या पिछले वर्ष के आंकड़े से कम है, लेकिन सक्रिय मरीजों और मौतों की स्थिति को देखते हुए विभाग सतर्क है।
मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा मामले
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद में डेंगू के सबसे ज्यादा 58 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद कोलकाता में 28 और उत्तर 24 परगना में 17 मामले सामने आए हैं। हुगली में 13 और हावड़ा में 10 मरीजों की जानकारी दी गई है।
कोलकाता नगर निगम भी डेंगू की रोकथाम के लिए विशेष निगरानी कर रहा है। निगम के वार्ड नंबर 78 और 109 को जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है। इन इलाकों में संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने और जरूरी रोकथाम संबंधी कदम उठाने पर जोर दिया जा रहा है।
फीवर क्लीनिकों में 9,400 लोगों की जांच
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, बुखार के मरीजों की पहचान और उपचार के लिए संचालित फीवर क्लीनिकों में अब तक 9,400 लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इनमें 392 लोगों में बुखार के लक्षण पाए गए। डेंगू की जांच के लिए 193 नमूने भी एकत्र किए गए हैं।
विभाग की ओर से दी गई जानकारी में 202 नमूनों के NS1 टेस्ट पॉजिटिव आने का भी उल्लेख है। हालांकि, नमूनों की संख्या और जांच से जुड़े इन आंकड़ों के बीच अंतर को देखते हुए संबंधित विवरण की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
डेंगू की समय पर पहचान के लिए बुखार के मरीजों की जांच, संदिग्ध मामलों की निगरानी और जरूरत के अनुसार उपचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि मरीजों में गंभीर लक्षण दिखाई देने पर उन्हें जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।
दुर्गा पूजा के दौरान बढ़ी सतर्कता
दुर्गा पूजा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के घरों से बाहर निकलने और विभिन्न इलाकों में भीड़ जुटने के बीच डेंगू की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए एक अहम चुनौती बनी हुई है। विभाग के अनुसार, संक्रमण का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मौसम में बदलाव और अल-नीनो के संभावित प्रभाव का उल्लेख करते हुए आने वाले महीनों में भी सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। हालांकि, अल-नीनो का डेंगू संक्रमण पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इसे लेकर अलग से वैज्ञानिक पुष्टि आवश्यक है।
डेंगू का प्रसार रोकने के लिए घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, नियमित रूप से सफाई करना तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना जरूरी है। बुखार होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह और जांच कराना भी महत्वपूर्ण है।
पिछले साल से कम मामले, फिर भी चिंता बरकरार
इस साल अब तक डेंगू के कुल मामले पिछले वर्ष की तुलना में कम होने के बावजूद सक्रिय मरीजों, गंभीर मामलों और मौतों की संख्या ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। खासकर कोलकाता और आसपास के जिलों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के सामने अब चुनौती दुर्गा पूजा के दौरान संक्रमण पर नियंत्रण रखने और आने वाले महीनों में नए मामलों को बढ़ने से रोकने की है। इसके लिए नियमित जांच, प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान और समय पर इलाज को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।































