सीएम सुभेंदु अधिकारी बोले— इस बार दुर्गापूजा के लिए हाई कोर्ट नहीं जाना पड़ा
कोलकाता : इस बार पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा का आयोजन पिछले वर्षों से काफी अलग है। महालया के अवसर पर बीजेपी सरकार की ओर से एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने दुर्गापूजा की तैयारियों, पूजा समितियों को सरकारी सहयोग और बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। वहीं, राज्यपाल आरएन रवि ने भी इस आयोजन को बंगाल में नई ऊर्जा और स्वर्णिम भविष्य की शुरुआत बताया।
मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने कहा कि इस बार दुर्गापूजा के आयोजन को लेकर पूजा समितियों को पहले की तरह हाई कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह दुखद स्थिति थी कि पहले दुर्गापूजा जैसे सांस्कृतिक आयोजन के लिए भी अदालत का रुख करना पड़ता था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस बार बिजली वितरण कंपनियों CESC और WBSEDCL की ओर से भी पूजा समितियों से शुल्क नहीं लिया जा रहा है।
2025 के मुकाबले 12,400 नई पूजा समितियों को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 12,400 अतिरिक्त दुर्गापूजा आयोजनों को मंजूरी देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने पूजा समितियों से आपसी सहयोग और समन्वय के साथ उत्सव मनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले दिनों में दुर्गापूजा के इतिहास, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाएगी। पूजा के दौरान सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जो लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, उनके लिए भी उपलब्ध स्थान और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इंतजाम किए गए।
विसर्जन के लिए 24 तारीख तक की समयसीमा
मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों से 24 तारीख तक प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा। उन्होंने बताया कि विसर्जन के दौरान घाटों पर विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
इसके साथ ही राज्य की संस्कृति और परंपराओं को प्रोत्साहित करने के लिए श्रेष्ठ दुर्गापूजा और श्रेष्ठ प्रतिमा को सम्मानित करने की भी बात कही गई। मुख्यमंत्री ने पूजा समितियों से प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विरोधी शक्तियों को परास्त करते हुए देश को 2047 तक विकास के नए मुकाम पर पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को दुर्गापूजा की शुभकामनाएं भी दीं।
राज्यपाल बोले— बंगाल में नई ऊर्जा का संचार
कार्यक्रम में राज्यपाल आरएन रवि ने कहा कि उन्होंने बंगाल में नई ऊर्जा के प्रवाह को व्यक्तिगत रूप से महसूस किया है। उन्होंने बताया कि महालया की सुबह चार बजे से ही घर-घर में मां दुर्गा के मंत्रों की गूंज सुनाई दे रही थी। लोकभवन में भी पहली बार पूरे परिवार ने एक साथ मां दुर्गा के जागरण और बीरेंद्र कृष्ण भद्र की ओजस्वी चंडीपाठ वाणी का आनंद लिया।

राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल आर्थिक और बौद्धिक क्षेत्रों में कभी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में भी बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका रही है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद लंबे समय तक राज्य का नेतृत्व ऐसे लोगों के हाथों में रहा, जिन्होंने मां दुर्गा की पूजा को केवल दिखावे तक सीमित रखा। उनके अनुसार, इसी वजह से बंगाल का पतन हुआ।
उन्होंने कहा कि अब राज्य में एक नया सूर्योदय हुआ है और ऐसा नेतृत्व मिला है, जो मां दुर्गा के प्रति आस्था रखता है। राज्यपाल ने कहा कि मां दुर्गा का अनादर नहीं होना चाहिए और बंगाल को फिर से गौरवशाली बनाने के लिए उनकी आराधना और आशीर्वाद आवश्यक है।
‘स्वर्णिम बंगाल’ बनाने का संकल्प
राज्यपाल ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार मां दुर्गा के प्रति आस्था और श्रद्धा के लिए समर्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि पश्चिम बंगाल एक बार फिर स्वर्णिम दौर की ओर बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले राज्य में निराशा और हताशा का माहौल था तथा लोगों ने उम्मीद खो दी थी। लेकिन अब लोगों में आस्था और विश्वास दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, लोग प्रतिदिन यहां आते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि बंगाल एक नई और स्वर्णिम यात्रा की ओर बढ़ चुका है।
राज्यपाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल का विकास मां दुर्गा के आशीर्वाद का फल है। उन्होंने मां दुर्गा से सभी भक्तों पर कृपा बनाए रखने की कामना की और लोगों से सुखी रहने के साथ स्वर्णिम बंगाल के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने राज्यवासियों को दुर्गापूजा की शुभकामनाएं दीं।































